CPEC की आड़ में 5 साल से वुहान शहर चीन और PAK मिलकर बना रहे हैं खतरनाक जैविक हथियार, आस्ट्रेलियन वेबसाइट की रिपोर्ट में खुलासा

रिर्पोट- आर सी ढौंड़ियाल

चीन की वुहान की लैब पाकिस्तान के साथ मिलकर पिछले पांच सालों से खतरनाक जैविक हथियारों पर काम कर रहे हैं और इन हथियारों पर प्रयोग भी कर रहे हैं. चीन और पाकिस्तान दोनों ही देश अपने इकोनॉमिक कॉरिडोर और सड़क निर्माण के नाम पर पूरी दुनिया के देशों को धोखा दे रहे हैं. ये दोनों देश एक साथ मिलकर पिछले पाँच सालों से बायो वेपन यानी जैविक हथियार बना रहे हैं. इस बात का खुलासा एक ऑस्ट्रेलियाई वेबसाइट द क्लाक्सोन ने किया है.

चीन और PAK मिलकर बना रहे हैं खतरनाक जैविक हथियार

द क्लाक्सोन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि चीन और पाकिस्तान की सेना ने पिछले महीने चुपके से चीन के साथ तीन साल की डील की है. इस डील के तहत वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में संभावित जैविक हथियारों को विकसित करने का समझौता भी शामिल है. इसके साथ ही यह खुलासा भी किया गया है कि चीन की वुहान शहर की ये लैब पाकिस्तान के साथ मिलकर साल 2015 से ही खतरनाक बैक्टीरिया-वायरस पर प्रयोग कर रही है.

 

    आस्ट्रेलियन वेबसाइट की रिपोर्ट में खुलासा

वेबसाइट ने दावा किया है कि वुहान और पाकिस्तान के वैज्ञानिकों ने अब तक पांच स्टडीज की है. इन स्टडीज को साइंटिफिक पेपर्स में भी प्रकाशित कराया गया है. सभी स्टडीज में zoonotic pathogens यानी पशुजन्यरोग की खोज और लक्षणों के बारे में चर्चा की गई है. zoonotic pathogens की वजह से ऐसी संक्रामक बीमारियां होती हैं जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं. जैसे कि आजकल कोरोना वायरस फैला हुआ है.

 PAK मिलकर बना रहे हैं खतरनाक जैविक हथियार,

    आस्ट्रेलियन वेबसाइट की रिपोर्ट में खुलासा

द क्लाक्सोन ने अपनी रिपोर्ट में ये भी दावा किया है कि इन पांचों स्टडीज में कई घातक और संक्रामक बीमारियों के जीनोम सिक्वेंसिंग के बारे में भी लिखा है. ये बीमारियां हैं- वेस्ट नाइल वायरस (West Nile Virus), मर्स कोरोना वायरस (MERS-Coronavirus), क्रिमियन-कॉन्गो हेमोरेजिक फीवर वायरस (Crimean-Congo Hemorrhagic Fever Virus), द थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम वायरस (Thrombocytopenia Syndrome Virus) और चिकनगुनिया वायरस

एक रिसर्च में ये बात भी सामने आयी है कि पाकिस्तान ने वुहान इंस्टीट्यूट को वायरस संक्रमित सेल्स मुहैया कराने के लिए शुक्रिया तक जताया था. इसके साथ ही रिसर्च को CPEC के तहत मिले सहयोग का भी जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्च पूरा करने के लिए हजारों पाकिस्तानी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का ब्लड सैम्पल लिया गया. इनमें वो लोग भी शामिल थे जोउस वक्त जानवरों के साथ काम करते थे और पाकिस्तान के दूरदराज इलाकों में रहते थे.

ऑस्ट्रेलियाई वेबसाइट का का दावा है कि चीन और पाकिस्तान एक समझौते के तहत ही संक्रामक बीमारियों पर शोध कर रहे हैं. हालांकि, असलियत कुछ और है ये दोनो ही देश संक्रामक बीमारियों की  आड़ में जैविक हथियारों के लिए रिसर्च  कर रहे है.और इन खतरनाक हतियारों को बना रहे हैं  फिलहाल इन वायरस से बचने की कोई वैक्सीन या सटीक इलाज मौजूद किसी भी देश के पास नहीं है. इनमें से कुछ वायरस को दुनिया के सबसे घातक और संक्रामक वायरस माना जा रहा है

जिन पांच स्टडीज का जिक्र आस्ट्रेलियाई वेबसाइट कर रही है. उसमें चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत मदद मिलने का जिक्र भी किया गया है. इसके बारे में लिखा गया है कि International Cooperation on Key Technologies of Biosafety along the China-Pakistan Economic Corridor. यानी CPEC के साथ बायोसेफ्टी संबंधी महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजीस पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग. गौरतलब है कि इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग वाले हिस्से को लेकर कभी सार्वजनिक घोषणा नहीं हुई है.

  PAK मिलकर बना रहे हैं खतरनाक जैविक हथियार,

    आस्ट्रेलियन वेबसाइट की रिपोर्ट में खुलासा

वुहान लैब ने पाकिस्तानी सेना के डिफेंस एंड टेक्नोलॉजी ऑ़र्गेनाइजेशन (DESTO) के साथ समझौता किया है जिसमें इसके वैज्ञानिक तेजी से फैल रहे संक्रामक रोगों पर अध्ययन करेंगे. ताकि इन बीमारियों को रोका जा सके. लेकिन यह सच नहीं दिखता.अगर वेबसाइट का दावा सही है तो अब समय आ गया है कि दुनिया के बाकी देशों को एक साथ मिलकर चीन और पाकिस्तान को उनकी इस हरकत के लिए सबक सिखाना चाहिए क्योंकि इनकी इस नापाक हरकत की बजह से आज पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है और पूरी दुनिया में कई लोगों ने इस महामारी के चलते अपने करीबियों को खोया है इसकी सजा चीन और पाकिस्तान को जरुर मिलनी चाहिए

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