पर्यावरण के ‘गांधी’ पद्म विभूषण सुंदरलाल बहुगुणा की 95वीं जयंती…

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देश के पर्यावरण को संरक्षित करने में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले विश्व विख्यात पर्यावरणविद्, पद्म विभूषण सुंदरलाल बहुगुणा की आज 95वीं जयंती है। उन्होंने हिमालय के वृक्षों के कटान के खिलाफ आयोजित ‘चिपको आंदोलन’ में अपनी अहम भूमिका निभाई थी, वह अपने नारे ‘पारिस्थितिकी स्थायी अर्थव्यवस्था है’ के लिए याद किये जाते हैं. 21 मई 2021 को 94 वर्ष की आयु में कोरोना संक्रमण के कारण उनका निधन हो गया था।

पद्म विभूषण सुंदर लाल बहुगुणा का जन्म 9 जनवरी 1927 को टिहरी गढ़वाल के मरोड़ा गांव में हुआ था। 13 साल की उम्र में उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई, दरअसल, राजनीति में आने के लिए उनके दोस्त श्रीदेव सुमन ने उनको प्रेरित किया था। सुमन गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांतों के पक्के अनुयायी थे, सुंदरलाल ने उनसे सीखा कि कैसे अहिंसा के मार्ग से समस्याओं का समाधान करना है 18 साल की उम्र में वह पढ़ने के लिए लाहौर गए 23 साल की उम्र में उनका विवाह विमला देवी के साथ हुआ।1956 में उनकी शादी होने के बाद राजनीतिक जीवन से उन्होंने संन्यास ले लिया। उसके बाद उन्होंने गांव में रहने का फैसला किया और पहाड़ियों में एक आश्रम खोला उन्होंने टिहरी के आसपास के इलाके में शराब के खिलाफ मोर्चा खोला। 1960 के दशक में उन्होंने अपना ध्यान वन और पेड़ की सुरक्षा पर केंद्रित किया।

Author: admin

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