प्रकृति के चितेरे कवि चन्द्र कुवंर की 73 वी पुण्य तिथि पर प्रदेश भर में उन्हें श्र्द्वाजलि देकर याद किया

प्रकृति के चितेरे कवि चन्द्र कुवंर की 73 वी पुण्य तिथि पर प्रदेश भर में उन्हें श्र्द्वाजलि देकर याद किया गया।देहरादून ज्योति विहार स्थिति चन्द्र कुवंर बर्तवाल शोध संस्थान कार्यालय में सस्था के सचिव डाॅ योगम्बर सिंह बर्तवाल और सदस्यों ने उनके चित्र पर माल्र्यापण कर उन्हें याद किया। इस दौरान डाॅ योगम्बर सिंह बर्तवाल ने उनकी देहरादून ऋषिपर्णा नदी पर लिखी कविता का पाठ किया। डाॅ बर्तवाल ने कहा कि आज के दिन 1943 को 9 बजे कवि चन्द्र कुवंर बर्तवाल ने दुनियां छोड दी थी।अपनी मृत्यु से पहले उन्होनें मृत्यु पर कविता भी लिख दी थी। हिन्दी को आगाध साहित्य दे चुके कवि चन्द्र कुवंर बर्तवाल ने हिमालय का वर्णन,बांज,बुरांस,देवदार की सुन्दरता के अलावा राष्ट्रीय आन्दोलन,स्वतंत्रता आन्दोलन,उपनिवेसबाद साम्यबाद,पूंजीवाद के खिलाफ कवितायें लिखीं।अपने छोटे से जीवन काल में उन्होंने तमाम विषयों पर एक हजार कवितायें,दो एकांकी नाटक व दोयात्रा वृतांत लिखकर हिन्दी साहित्य की आगाध सेवा की।


उनकी तुलना हिन्दी के बड़े कवि जयशंकर प्रसाद,महदेवी बर्मा,निराला,रविन्द्र नाथ टैगोर कवियों से और अग्रेजी में शैली और कीटस से की जाती है।कम उम्र मे ही वह हिन्दी को बहुत बडी धरोहर देकर चले गये,।चन्द्र कुवंर बर्तवाल शोध संस्थान पिछले 40 सालों से उनके जीवन काल और साहित्य के लिए सर्मपित हो कर कार्य कर रहा है। उनकी कविता को अब पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया है।साथ ही इस विषय पर शोध कर रहे विद्याथियों को शोध सामाग्री उपलब्ध करा रहा है। पिछले साल से मनाये जा रहे उनके शताब्दी समारोह के दौरान उनके मूल गांव मालकोटी,अगस्त्यमुनी इंटर काॅलेज,अगस्त्यमुनी डिग्रीकाॅलेज,डिग्रीकाॅलेज पांवलिया,कर्णप्रयाग इंटर काॅलेज,उत्तकाशी व रामनगर में भव्य कार्यक्रम किये गये जिसमें उनके जीवन दर्शन पर खास चर्चा की गई।इस दौरान उनके जीवन दर्शन पर एक ग्रंथ चन्द्र कुवर वर्तवाल शताब्दी ग्रंथ भी प्रकासित किया गया।इस दौरान संस्था के अध्यक्ष मनोहर सिंह रावत,डाॅ मनीक्षी रावत,समर भण्डारी,कुलवंती देवी,मोहन सिंह नेगी,मीडया प्रभारी भानु प्रकाश नेगी मौजूद रहे।

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