Sunday, May 9, 2021
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राशन कार्डो में बड़ा गड़बड़ झाला

                             गढवाल में राशन कार्डो में बड़ा गड़बड़ झाला

आर सी ढौंडियाल

श्रीनगर गढवाल में राशन कार्डो में बड़ा गड़बड़ झाला सामने आ रहा  है.. अब जब  खाद्य एव  पूर्ति विभाग  ने राशन कार्डो की गहनता से  छानबीन की तब ये पूरा मामला पकड में आया है अभी तक ऐसे 80 कार्ड धारक मिले जिनकी आमदनी ज्यादा होने के बावजूद भी बीपीएल और अन्तोदय कार्ड का लाभ ले रहे थे..इसके अलावा 50 से ज्यादा लोगो को राशन कार्ड में गडबडी को लेकर नोटिस भी भेजा गया है

उत्तराखंड के खाध्य आपूर्ति विभाग में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है जी हाँ ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ये मानना है खुद खाधय विभाग का…. दरअसल कोरोना काल में फ्री के राशन बाँटते वक्त जब विभाग ने बीपीएल और अंत्तोदय राशन कार्डो की जाँच की तो पता लगा कि कई लोग ऐसे हैं जो आलीशान बंगलों में रहते हैं लेकिन राशन गरीबों के हक की डकार रहे हैं ऐसे में विभाग ने ऐसे फर्जी 70 से 80 राशम कार्डो को निरस्त कर दिया है साथ ही 50- 60 लोगों को उनके कार्डो में गडबडी के चलते नोटिस भेजा गया है… सटीक जबाव ना मिलने पर उनके कार्ड भी निरस्त कर दिए जायींगे

उत्तराखंड के खाध्य विभाग के कर्मी की मानेतो प्रदेश में कोरोना काल के दौरान राज्य और केंद्र सरकार द्वारा  बीपीएल और अंत्तोदय के कार्डधारकों को तीन महीने की राशन बाँट दी गई है साथ ही सभी कार्ड धारको को आय प्रमाण पत्र देने के लिए करने के लिए भी राशन डीलरों को कहा गया है.. अगर कोई कार्ड धारक वक्त रहते आय प्रमाण पत्र नहीं दे पाता है तो उसका कार्ड केंसिल किया जायेगा……. स्थानीय बुद्दजीबियों का भी मानना है कि जो लोग गरीबों के हिस्से का राशन ले रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए इन लोगों की वजह से जरूरतमंद लोग भूखे पेट रहने को मजबूर हैं…. जो लोग सक्षम हैं उनको गरीबों का हक नही मारना चाहिए

देशभर में राशन के बंटवारे में गडबड झालें की खबरें तो अक्कसर आती रही हैं…. लेकिन जब सक्षम लोग ही गरीबों के हक का राशन डकारने लगें तो सरकारी महकमें की पेशानी पर बल पडना लाजमी है.. हलाँकि विभाग ने इस मामले में कार्रवाई तो की है लेकिन अभी भी कई बडे मगरमच्छों के खिलाफ कार्रवाई होना बाकी है…. सवाल सरकारी महकमें के  आला अधिकारियों के ऊपर भी उठते हैं कि आखिर एक आम आदमी को सरकारी सुबिधाओं का फायदा लेते वक्त तमाम कायदे कानूनों का हवाल दिया जाता है तो उन्हीं अधिकारियों के चलते आखिर इस तरह का फर्जीवाडा कैसे हो जाता है

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