एशिया ( Only one in Asia ) के एकमात्र इस हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग कॉलेज ( Hydrolic Engineering college) में नियुक्तियों ( Appointment) में हुआ फर्जीवाड़ा( Wrong method adopted), ऐसे हुआ खुलासा( Exposed)

खबरदार ब्यूरो

30/11/2021

 

शिया का एकमात्र टिहरी हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में नियुक्तियों को लेकर सूचना अधिकार से हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

आपको बताते चलें कि टिहरी हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज हमेशा से विवादों में रहा लेकिन इस हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज की दशा और दिशा सुधारने में उत्तराखंड सरकार भी असफल हो गई है जिसकी बानगी इस हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में हुए नियुक्ति फर्जीवाड़ा से हो रहा है,

सूचना का अधिकार लेने वाले संदीप कुमार ने  द्वारा  हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज भागीरथी पुरम टिहरी में सूचना अधिकार से सूचना ली गई , उस सूचना में पाया गया कि जितेंद्र पाल सिंह पुंडीर ग्राम बड़ा  स्यूटा चंबा टिहरी गढ़वाल पर्सनल पीए डायरेक्टर, हितेंद्र सिंह

इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में तकनीकी सहायक ,  हरेंद्र सिंह मकान संख्या 907 इंद्र नगर कॉलोनी पोस्ट न्यू फॉरेस्ट नियर आइटीबीपी सीमद्वार देहरादून प्रोगामर, सोहनलाल पेटवाल ग्राम पेटव पोस्ट जाखणीधार टिहरी गढ़वाल तकनीकी सहायक के पद पर कार्यरत है ,

सूचना में खुलासा हुआ है कि सोहनलाल पेटवाल की उम्र नियुक्ति के दौरान  ज्यादा थी और फिर भी हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज निदेशक जी एस तोमर  ने अपने हस्ताक्षरओं से नियमों को ताक पर इन्हें नौकरी दे दी

साथ ही बताते चलें कि इन अवैध नियुक्तियों के खिलाफ हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज के गेर शिक्षण कर्मचारियों के द्वारा एक महीने से अधिक तक इन अबैध नियुक्तियों के खिलाफ धरने पर बैठे रहे, कॉलेज के  नए कार्यवाहक निदेशक डॉक्टर के के मीर ने आंदोलनकारियों की मांग को मानते हुए आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि संस्थान के हित में अपना आंदोलन समाप्त करके आश्वासन दिया कि हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में जो भी फर्जी तरीके से अवैध नियुक्तियां हुई हैं उनकी जांच एक महीने के अंदर पूरी कर के साथ ही इनका वेतन निर्गत नहीं किया जाएगा, लेकिन आश्चर्य की बात है कि कई महीने बीतने के बाद भी इन अवैध नियुक्तियों के खिलाफ कोई जांच नहीं हुई और ठीक उल्टा  अवैध नियुक्ति पाए हुए लोगों का वेतन निर्गत कर दिया गया, जिससे गैर शिक्षण कर्मचारियों में गुस्सा उठने लगा है साथ ही सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में हुई नियुक्तियों को लेकर सवाल उठाए हैं ओर सामाजिक कार्यकर्ताओ कहना है कि हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक आखिर क्यों इस फर्जीवाड़े को बढ़ावा दे रहे हैं और अब तक क्यों कार्यवाही नहीं हुई

RTI कार्यकर्ता संदीप की बाइट

उत्तराखंड सरकार में लगभग एक साल बाद कार्यवाहक निदेशक को हटाकर डीएम टिहरी को हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज का प्रशासक नियुक्त किया गया है

वहीं सूचना अधिकार लेने वाले संदीप कुमार ने हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रशासक डीएम के पास इन अवैध नियुक्तियों के खिलाफ जांच करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया जिस पर टिहरी डीएम ने एसडीएम को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए जांच करने के निर्देश दिए परंतु यह जांच एक साल बीतने पर भी नहीं हो पाई

  •  जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने जनसभा के दौरान मंच से बार बार जनता को विश्वास दिलाने की बात कर रहे हैं कि हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस और जीरो पेंडेंसी की नीति पर काम कर रही है लेकिन पुष्कर सिंह धामी की जीरो टॉलरेंस और जीरो पेंडेंसी की नीति पर हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज प्रबंधन  खुलेआम धज्जियां उड़ाने में लगा है

आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत पर भी आज तक अवैध नियुक्तियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई इस हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में सबसे बड़ा आश्चर्य इस बात का हो रहा है कि इन चार नियुक्तियों में सुंदरलाल पेटवाल की आयु सीमा ज्यादा होने के बावजूद भी हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज  के निदेशक जी एस तोमर के द्वारा इनको नियुक्ति दे दी गई

इस कॉलेज के दूसरे पहलू की तरफ ले चलते हैं कि  हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित भारत सरकार की (TEQIP-|||) तकनीकी शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए( तकनीकी शिक्षा गुणात्मक सुधार कार्यक्रम ||| ) के माध्यम से की गई थी जिसमें सरकार द्वारा विधिवत पद सृजित एवं स्वीकृत किए गए थे और अब विश्व बैंक का यह प्रोजेक्ट 42 महीने बाद खत्म हो गया है और विश्व बैंक प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद  हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज से संबंधित नियम  स्वता ही खत्म हो गए

विश्व बैंक का नियम कहता है कि जब प्रोजेक्ट खत्म हो जाता है तो उसके नियम भी स्वता ही खत्म हो जाते हैं और अब हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज 42 महीने बाद भी विश्व बैंक का प्रोजेक्ट खत्म हो गया है और  विश्व बैंक के नियमानुसार प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद इस प्रोजेक्ट में  काम कर रहे उपरोक्त चार कर्मचारी जिनको स्थाई नियुक्ति दे दी गई है वह मान्य नहीं है,

टीएचडीसी के सीएमडी ने तत्कालीन राज्यपाल व मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि सरकार में संस्थान को चलाने के जो भी नियम बनाए हैं वह सभी नियम विरुद्ध गलत हैं और उन्होंने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से पत्र लिखकर आग्रह भी किया था कि हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज को नियमानुसार अनुबंध के अनुसार संचालित करने दिया जाए लेकिन सीएमडी के द्वारा दिए गए पत्र पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई जिससे  सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं साथ ही सीएमडी ने  मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र दिया कि  हाइड्रो इंजरिंग कॉलेज से संबंधित जो अनुबंध किया गया है उसमें किसी भी तरह का कोई संशोधन नहीं किया जा सकता, और यह संस्थान अनुबंध के आधार पर संचालित होता है

माननीय उच्च व सर्वोच्च न्यायालय ने इस संस्थान में 16 लोगों को नियुक्त भी माना है और लगभग 15 बार से अधिक न्यायालय ने इनको सही माना है

इसके वावजूद हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में न्यायालय के आदेशों की खुलेआम  अवहेलना  करते हुए वरिष्ठ प्रवक्ता डॉक्टर ए के सिंह को किसी प्रकार का कोई लाभ नहीं दिया गया और सबसे आश्चर्य की बात है कि डॉक्टर ए के सिंह को अभी तक डेढ़ साल का वेतन नहीं दिया गया जबकि कोरोना काल में डॉक्टर ए के सिंह की पत्नी की कोरोना से मौत हुई, जिससे डॉक्टर ए के सिंह काफी आहत भी हैं और डॉक्टर ए के सिंह के द्वारा लगातार अपने डेढ़ साल के वेतन की मांग करते  आ रहे है परंतु हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रबंधन द्वारा लगातार डॉक्टर ए के सिंह को मानसिक प्रताड़ित किया जाता रहा ओर आज तक वेतन नही मिला,जबकि डॉक्टर ए के सिंह ने संस्थान के प्रशासन से बार-बार अपने वेतन निर्गत करने के संबंध में अनुरोध किया परंतु उन्हें अभी तक डेढ़ साल का वेतन नहीं मिला जिससे डॉक्टर ए के सिंह ने मजबूरन होकर अपर मुख्य सचिव को पत्र लिख कर वेतन की मांग के साथ साथ  हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में चल रहे गड़बड़ियों को लेकर जांच की मांग की है,

 

आर टी आई कार्यकर्ता संदीप  ने कहा कि मैंने सूचना अधिकार के तहत एशिया के एकमात्र हाइड्रोजन इन कॉलेज में हुए नियुक्ति को लेकर सूचना अधिकार लगाया था जिसमें नियुक्ति को लेकर फर्जीवाड़ा का उजागर किया गया जिसमें ऐसे अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर दी गई जिसकी उम्र ज्यादा है और उसे कम उम्र दिखाकर नियुक्ति दे दी और ऐसे व्यक्ति को भी नियुक्ति दे दी जिसके पास अभी तक कोई अनुभव प्रमाण पत्र नहीं है और उस व्यक्ति के द्वारा राजकीय  निर्माण निगम विभाग से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनाकर नियुक्ति पाई है,साथ ही मैंने इस मुद्दों को लेकर जिला प्रशासन से लेकर शासन तक शिकायत की लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई

 

वही प्रभारी जिलाधिकारी नमामि बंसल ने कहा कि डायरेक्टर द्वारा इसमें जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है जो इस पर जांच का गई है और तत्काल जांच कमेटी से जांच रिपोर्ट मंगा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी

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