कोरोना (Corona)की तीसरी लहर( Third wave) के लिए एम्स( AIIMS) तैयार

कोरोना (Corona)की तीसरी लहर( Third wave )

  1. कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए एम्स में स्थापित हो रहा नया ऑक्सीजन प्लाट 1000 लीटर प्रति मिनट होगी उत्पादन क्षमता लाखों लोगों को मिलेगा लाभ ऑक्सीजन के कारण अब नहीं गवानी पड़ेगी मरीजों को जान करोना की तीसरी लहर को देखते हुए एम्स ऋषिकेश में हवा से ऑक्सीजन पैदा करने वाला ’पीएसए ऑक्सीजन प्लान्ट’ स्थापित किया जा रहा है।यह प्लान्ट कोविड मरीजों के इलाज में विशेष लाभकारी सिद्ध होगा। उम्मीद है कि एक माह के भीतर प्लान्ट से ऑक्सीजन का उत्पादन होने लगेगा।   गंभीर किस्म के रोगियों के इलाज हेतु सुविधाओं में इजाफा करते हुए एम्स ऋषिकेश अब स्वयं ही मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन करेगा। इस सुवीधा को शुरू करने के लिए डीआरडीओ की मदद से एम्स में ऑक्सीजन प्लान्ट लगाया जा रहा है। पीएसए ( प्रेशर स्विंग एडसॉर्प्शन ) तकनीक आधारित इस प्लान्ट से चौबीसों घन्टे प्रति मिनट 1000 लीटर ऑक्सीजन गैस का उत्पादन होगा। इस बारे में जानकारी देते हुए ऑक्सीजन प्लान्ट प्रोजेक्ट के नोडल ऑफिसर डॉक्टर अजय कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर की चुनौतियों से निपटने में यह प्लान्ट विशेष लाभकारी सिद्ध होगा।

बाइट  डा अजय कुमार, नोडल ऑफिसर एम्स ऋषिकेश

 

  1. अभी तक एम्स में भर्ती मरीजों के इलाज के लिए बाह्य क्षेत्र से लिक्विड ऑक्सीजन मंगवाकर उसे स्टोर करने की व्यवस्था है और फिर उसे गैस में परिवर्तित कर पाईपलाईन के माध्यम से अस्पताल के विभिन्न वार्डों तक पंहुचाया जाता है। डॉ. अजय ने बताया कि पीएम केअर फन्ड से तैयार हो रहे इस प्लान्ट से एक महीने के भीतर ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि एम्स ऋषिकेश में मौजूदा समय में 30 हजार लीटर क्षमता का लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज प्लान्ट लगा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को यहीं से ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है। नए ऑक्सीजन प्लान्ट के स्थापित हो जाने से 15 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन सप्लाई पर एक ही समय में 64 वेन्टिलेटर अतिरिक्त तौर से संचालित किए जा सकेंगे और ऑक्सीजन सप्लाई की क्षमता पहले की अपेक्षा अब डेढ़ गुना तक बढ़ जाएगी।  करो ना की तीसरी लहर को देखते हुए एम्स में स्थापित हो रहा नया ऑक्सीजन प्लान्ट1000 लीटर प्रति मिनट होगी उत्पादन क्षमता लाखों लोगों को मिलेगा लाभ ऑक्सीजन के कारण अब नहीं गवानी पड़ेगी मरीजों को जान

     

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