हरीश रावत उतरे मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की तारीफ में, जानिए इसके पीछे की हरदा राजनीति

देहरादून

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ‘मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना’की सराहना की है| उन्होंने लिखा है कि ये सरकार का अच्छा निर्णय है, हालांकि उन्होंने इस योजना का नाम नहीं लिया,लेकिन कोरोनाकाल में जिन बच्चों ने अपने मां बाप को खो दिया है और जिस घर ने अपने कमाने वाला सदस्य खो दिया है, उनकी मदद के लिये राज्य सरकार के हाथ आगे बढ़ें और इस कोरोना महामारी के दौरान अनाथ हुये बच्चों को 5 प्रतिशत क्षैतिजीय आरक्षण की जो बात कही गई है वो उसका स्वागत करते हैं

KHABARDAR Express...
साथ ही उन्होंने लिखा है कि उत्तराखंड सरकार को यह सुझाव देना चाहूंगा कि किसी भी दुर्घटना में यदि किसी परिवार का कमाने वाला सदस्य अकाल कालकल्वित होता है, तो ऐसे परिवार के बच्चों को आरक्षण देना और आर्थिक मदद देना, एक अच्छा कदम है और मैं कांग्रेस से भी आग्रह करूंगा कि इस कदम को भविष्य के लिये वो अपने वादे के तौर पर याद रखेगी साथ ही ये भी लिखा कि तीरथ सिंह जी ने यह अच्छा कदम उठाया है। यहां से शुरू हुई हरदा राजनीति उन्होंने सी एम तीरथ रावत पर तंज कसते हुए लिखा है कि, लगता है, उनके प्रधान सलाहकार का अनुभव उनके काम आने लग गया है।

साथ ही वो केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंक के हाल ही में 120के बोर्ड परीक्षा के फैसले से भी सहमत दिखे उन्होंने लिखा है कि 12वीं की परीक्षा होगी, यह निर्णय समझ में नहीं आ रहा है।एक तरफ कोरोना की दूसरी लहर इतनी प्रबल है और तीसरी लहर का डर बना हुआ है। माँ बाप परीक्षा केन्द्र तक बच्चे को छोड़ेंगे,मगर परीक्षा केन्द्र में क्या गारंटी है कि शेष सब लोग कोरोना निगेटिव होंगे,यदि उनमें से.
एक भी व्यक्ति पोजटिव होगा तो बच्चों की जिन्दगी खतरे में पड़ सकती है। मैं, माननीय केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री, डा रमेश पोखरियाल निशंक जी से आग्रह करूंगा कि वो परीक्षा करवाने की हठ छोड़ें।

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उन्होंने लिखा है कि ये सरकार का अच्छा निर्णय है, हालांकि उन्होंने इस योजना का नाम नहीं लिया,लेकिन कोरोनाकाल में जिन बच्चों ने अपने मां बाप को खो दिया है और जिस घर ने अपने कमाने वाला सदस्य खो दिया है, उनकी मदद के लिये राज्य सरकार के हाथ आगे बढ़ें और इस कोरोना महामारी के दौरान अनाथ हुये बच्चों को 5 प्रतिशत क्षैतिजीय आरक्षण की जो बात कही गई है वो उसका स्वागत करते हैं साथ ही उन्होंने लिखा है कि उत्तराखंड सरकार को यह सुझाव देना चाहूंगा कि किसी भी दुर्घटना में यदि किसी परिवार का कमाने वाला सदस्य अकाल कालकल्वित होता है, तो ऐसे परिवार के बच्चों को आरक्षण देना और आर्थिक मदद देना, एक अच्छा कदम है और मैं कांग्रेस से भी आग्रह करूंगा कि इस कदम को भविष्य के लिये वो अपने वादे के तौर पर याद रखेगी साथ ही ये भी लिखा कि तीरथ सिंह जी ने यह अच्छा कदम उठाया है। यहां से शुरू हुई हरदा राजनीति उन्होंने सी एम तीरथ रावत पर तंज कसते हुए लिखा है कि, लगता है, उनके प्रधान सलाहकार का अनुभव उनके काम आने लग गया है। साथ ही वो केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंक के हाल ही में 120के बोर्ड परीक्षा के फैसले से भी सहमत दिखे उन्होंने लिखा है कि 12वीं की परीक्षा होगी, यह निर्णय समझ में नहीं आ रहा है।एक तरफ कोरोना की दूसरी लहर इतनी प्रबल है और तीसरी लहर का डर बना हुआ है। माँ बाप परीक्षा केन्द्र तक बच्चे को छोड़ेंगे,मगर परीक्षा केन्द्र में क्या गारंटी है कि शेष सब लोग कोरोना निगेटिव होंगे,यदि उनमें से. एक भी व्यक्ति पोजटिव होगा तो बच्चों की जिन्दगी खतरे में पड़ सकती है। मैं, माननीय केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री, डा रमेश पोखरियाल निशंक जी से आग्रह करूंगा कि वो परीक्षा करवाने की हठ छोड़ें।

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