Sunday, May 9, 2021
Dark black and orange > ख़ास ख़बर > स्थानीय युवकों ने खोजा हिमालय में एक खास ताल

स्थानीय युवकों ने खोजा हिमालय में एक खास ताल

रिर्पोट- आर सी ढौड़ियाल

केदारघाटी में एक और ताल को खोजा गया है पर्यटकों और ट्रैकरो की नजरो से अब तक दूर इसताल का नाम पैंयाँ ताल है, जो केदारनाथ से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर है…… हाल ही में दो स्थानीय युवकों ने इस ताल को ढूड़ा हैं

KHABARDAR Express...

उत्तराखंड़ को कुदरत ने कई नायब तोफौ से नवाजा है….. यहाँ की सुन्दरता में पहाड़, घाटियाँ, जंगल, जंगली जानबर, हिमालय तो चार चाँद लगाता ही यहाँ के खुबसूरत ताल भी इसकी खुबसूरती में निखार लाते है हाल ही में दो पर्यटको ने केदारघाटी में एक औऱ ताल को खोज लिया है उनकी माने तो ये ताल सुमेरु पर्वत की छाया इस ताल की सुन्दरता में चार चाँद लगाती है दरसअल हाल ही में दो स्थानीय युवक संदीप कोहली और तनुज रावत अपने दो साथियों के साथ केदारनाथ गए थे। वहां से ये लोग वासुकीताल पहुंचे। जहां पर उनको स्वामी बलराम दास मिले, जो वहां एक छोटी सी गुफा में साधना कर रहे थे। यूं तो बाबा बीते पांच  सालों से गरूड़चट्टी में रह रहे हैं, लेकिन साल में कुछ दिनों के लिए वो यहां साधना के लिए आते हैं। उन्होंने युवाओं को  बताया कि दूध गंगा घाटी में एक भव्य ताल है, जिसके बारे में किसीको  अब तक जानकारी नहीं है। करीब तीन  पहले वो पहली बार पैंया ताल गए थे। इसके बाद संदीप व तरूण वासुकीताल से आठ किमी दूरी तय कर लगभग दो घंटे में पैया ताल पहुंचे।

केदारघाटी में एक और ताल को खोजा गया है पर्यटकों और ट्रैकरो की नजरो से अब तक दूर इसताल का नाम पैंयाँ ताल है, जो केदारनाथ से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर है…… हाल ही में दो स्थानीय युवकों ने इस ताल को ढूड़ा हैं….

उत्तराखंड़ को कुदरत ने कई नायब तोफौ से नवाजा है….. यहाँ की सुन्दरता में पहाड़, घाटियाँ, जंगल, जंगली जानबर, हिमालय तो चार चाँद लगाता ही यहाँ के खुबसूरत ताल भी इसकी खुबसूरती में निखार लाते है हाल ही में दो पर्यटको ने केदारघाटी में एक औऱ ताल को खोज लिया है उनकी माने तो ये ताल सुमेरु पर्वत की छाया इस ताल की सुन्दरता में चार चाँद लगाती है दरसअल हाल ही में दो स्थानीय युवक संदीप कोहली और तनुज रावत अपने दो साथियों के साथ केदारनाथ गए थे। वहां से ये लोग वासुकीताल पहुंचे। जहां पर उनको स्वामी बलराम दास मिले, जो वहां एक छोटी सी गुफा में साधना कर रहे थे। यूं तो बाबा बीते पांच  सालों से गरूड़चट्टी में रह रहे हैं, लेकिन साल में कुछ दिनों के लिए वो यहां साधना के लिए आते हैं। उन्होंने युवाओं को  बताया कि दूध गंगा घाटी में एक भव्य ताल है, जिसके बारे में किसीको  अब तक जानकारी नहीं है। करीब तीन  पहले वो पहली बार पैंया ताल गए थे। इसके बाद संदीप व तरूण वासुकीताल से आठ किमी दूरी तय कर लगभग दो घंटे में पैया ताल पहुंचे।

KHABARDAR Express...

केदारघाटी में एक और ताल को खोजा गया है पर्यटकों और ट्रैकरो की नजरो से अब तक दूर इसताल का नाम पैंयाँ ताल है, जो केदारनाथ से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर है…… हाल ही में दो स्थानीय युवकों ने इस ताल को ढूड़ा हैं….

KHABARDAR Express...

उत्तराखंड़ में मौजूद कुदरत की नायाब धरोहरों की अगर सरकार और स्थानीय लोग सलीके से देख रेख करें तो पर्यटन के जरिए कुदरत की ये सौगाते न सिर्फ स्थानीय लोगों की आया का जरिया बन सकते हैं बल्कि इस प्रदेश को एक नई पहचान भी दिला सकते हैं बस जरुरत इस बात की है कि कुदरत की इन नायाब धरोहरों को संजोया जाय और सलीके से इनका प्रचार प्रसार किया जाय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *