Sunday, May 9, 2021
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लो आखिरकार हो ही गया उत्तराखंड़ में थर्ड़ फ्रंट का गठन,लगता है, अब फस्ट और सेकिड़ फ्रंट की खैर नहीं…

ऋषिकेष से नीरज गोयल की रीर्पोट

लो आखिरकार हो ही गया उत्तराखंड़ में थर्ड़ फ्रंट का गठन,लगता है, अब फस्ट और सेकिड़ फ्रंट की खैर नहीं…अगर इस फ्रंट के दावों को सही माना जाय तो उत्तराखंड़ में तीसरे मोर्चे का गठन हो गया है अब बारी इसके दावों की हकीकत की पता चलेगी साल 2022 के विधान सभा चुनावों में अगर जनता ने इस मोर्चे का साथ दिया तो उत्तराखंड़ को अपना क्षेत्रीय दल मिल जायेगा जो इस पहाड़ी सूबे के बुनियादी मसलों की बात कर सकता है यानि हमारे जल, जंगल और जमीन की बात

बहराल धर्म नगरी ऋषिकेश से सर्वजन स्वराज पार्टी नाम से एक क्षेत्रीय दल का गठन हुआ है अगर इस दल के दावों पर यकीन करें तो दल आने वाले दिनों में उत्तराखंड़ के जमीनी मुद्दों की बात करता हुआ दिखाई देगा जिससे जनता का जुड़ाव इस दल के साथ होने का दावा इसके नेता कर रहे है अगर हम अभी इनकी बातों पर यकींन करें तो इसके बाद पहाड़ के लोगों को अपनी बुनियादी समस्याओं के निपटारें के लिए राष्ट्रीय पार्ट्रियों के दिल्ली में बैठे आलाकमान का मुँह नहीं ताकना पड़ेगा

फिलहाल इस पार्टी का फोकस अपने ज्यादा से ज्यादा सदस्य बनाने पर है जो होना भी चाहिए पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगतराम डोगरा और राष्ट्रीय वरिष्ट महासचिव डी के पाल के मुताबिक इसके बाद पार्टी के नेता जनता के साथ मिलकर उत्तराखंड़ के जन मुद्दों के निस्तारण के लिए धरना प्रदर्शन करेगें और सरकार को उनका समाधान करने के लिए मजबूर करेगें

बहराल धर्म नगरी ऋषिकेश से जो सर्वजन स्वराज पार्टी नाम से एक क्षेत्रीय दल का गठन हुआ है अगर इस दल के दावों पर यकीन करें तो दल आने वाले दिनों में उत्तराखंड़ के जमीनी मुद्दों की बात करता हुआ दिखाई देगा जिससे जनता का जुड़ाव इस दल के साथ होने का दावा इसके नेता कर रहे है अगर हम अभी इनकी बातों पर यकींन करें तो इसके बाद पहाड़ के लोगों को अपनी बुनियादी समस्याओं के निपटारें के लिए राष्ट्रीय पार्ट्रियों के दिल्ली में बैठे आलाकमान का मुँह नहीं ताकना पड़ेगा और ना ही बार बार के नेतृत्व बदलने के नुकसान को झेलना पड़ेगा, अब गेंद पूरी तरह से इस क्षेत्रीय पार्ट्री के पाले में है कि अगर वो अभी जो दावें और वादे उत्तराखंड़ की जनता से कर रही है उनको आखिर तक याद रखे क्योंकि इस बात से सभी इतिफाक रखते हैं कि उत्तराखंड़ की जनता पढ़ी लिखी है और वो आसानी से किसी के झाँसे में नहीं आती है अगर इस पार्ट्री के नेताओं ने इमानदारी से यहाँ के लोगों की सेवा की तो इतिहास गवाह है, तब पहाड़ के लोग निजाम भी बना देते है और निजाम की जमुरियात भी खुशी खुशी बन जाते हैं लेकिन कहीं कोई फरेब की मनसा पाले हो तो खबरदार! बरखुरदार, पुरानी क्षेत्रीय पार्ट्रियों का हस्ल देखकर ही अपने घोषणापत्र बनाना, पहाड़ के लोग आसानी से हर किसी की दाल नहीं गलने देते हैं…….

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