Sunday, May 9, 2021
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ये घास है कोरोना की सहेली, भगवान ही बचाऐ इससे

रिर्पोट- आर सी ढ़ौड़ियाल

कोरोना महामारी में ये गाजर घास इनसानों के लिए काफी खतरनाक मानी जा रही हैऔर अगर इस घास की खुशबू इंसान के फेफड़ों में पहुँच जाय तो इंसान की जान पर बन आती है, जिस सूबे का 71 फीसदी इलाका जंगलों से घिरा हो साथ ही जहाँ लगभग 700 से भी ज्यादा किस्मों की जैव विविधताऐं पाई जाती हो, आज वहाँ बीते दो दशक से बीते जमाने में अमेरिका और दूसरे देशों से गेहूँ के  साथ आयी गाजर घास,लैन्टाना और काला बांस ने अपनी जडें इस कदर जमा ली हैं कि यहां की जैव विविधता और जंगल आज खतरे में है। वहीं कोरोना  महामारी में तो ये गाजर घास इनसानों के लिए काफी खतरनाक मानी जा रही है…

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कोरोना महामारी में ये गाजर घास इनसानों के लिए काफी खतरनाक मानी जा रही हैऔर अगर इस घास की खुशबू इंसान के फेफड़ों में पहुँच जाय तो इंसान की जान पर बन आती है,पिछले दो दशक से ज्यादा समय से उत्तराखंड के शहरों और गांवों के खाली मैदानों और सड़को के किनारे उगी गाजर घास ने अपनी जडें जमा ली हैं इसकी बजह से यहाँ की घास की जड़ें  मिट रही हैं। इससे न सिर्फ इंसान को बल्कि जानवरों को भी खासा नुकसान पंहुच रहा है। प्रसिद्व पर्यावरणविद…. पदम्श्री कल्याण सिंह रावत, मैती  की मानें तो पिछले कई दशकों से इस खतरनाक घास खात्में के लिए राज्य सरकार  ने अभी तक कोई ठोस पहल नहीं की है। उनकी माने तो पहाडी जिलों में इसे रोकने के लिए उन्होंने पहले कई कोशिशें की थी लेकिन सरकारी महकमों की लापरवाही के चलते आज इसघास की वजह से गम्मभीर आलत पैदै हो गए हैं

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कोरोना महामारी में ये गाजर घास इनसानों के लिए काफी खतरनाक मानी जा रही हैऔर अगर इस घास की खुशबू इंसान के फेफड़ों में पहुँच जाय तो इंसान की जान पर बन आती है प्रदेश में गाजर घास का फैलाव इस कदर हो गया है कि अब इसको मिटाना मुश्किल हो रहा है।  गौरतलब है कि गाजर घास न सिर्फ जैवविविधता को नुकसान पहुँचा रही है बल्कि इन दिनों इसके फूल स्वास संबंधी रोगों के लिए काफी खतरनाक माने जा रहे हैं ।इसकी बजह है कि कोरोना महामारी इंसान फेंफड़ो को ही नुकसान पहुँचाती है और इसके पूलों के कण स्वास नली में जाने पर खतरनाक एलर्जी पैदा करते है। बरिष्ठ फीजीशियन डॉ अजीत गैरोला की माने तो क गाजर घास के फूल से दमे के हालात पैदा हो जाते है जिसकी बजह से कोरोना की समस्या बड़ सकती है।

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कोरोना महामारी में ये गाजर घास इनशानों के लिए काफी खतरनाक मानी जा रही हैऔर अगर इस घास की खुशबू इंसान के फेफड़ों में पहुँच जाय तो इंसान की जान पर बन आती हैजैव विविधता एवं इंसानो की सेहत के लिए खतरनाक मानें जाने वाली गाजर घास के खात्में के लिए अभी तक  भी कोई ठोस नीति का न बनाया जाना वाकई में काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। इन दिनों कोरोना महामारी के चलते ये घास लोगों के स्वास से जुड़े रोगों को बढ़ा सकती है इसलिए समय से इस समस्या का ठोस हल निकालना होगा

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