ये आम था काफी खास इसीलिए बिका दस हजार का

खबरदार ब्यूरो

लाकडाउन के चलते तुलसी की पढाई नहीं हो पा रही थी। ऑन लाइन पढाई के लिए उसे स्मार्ट फोन चाहिए था। वह कहां से लाए इतना पैसा । पढाई रुके नहीं इसलिए वह बागान से चुने आम लाकर सड़क किनारे बेचा करती थी। उसके कितने आम बिक पाते और कब वह मोबाइल खरीद पाती। लेकिन मुंबई के एक दरियादिल , संवेदनशील व्यक्ति  ने  उसके पढने के प्रति जज्बात को देखा। उसके बारह आम एक लाख बीस हजार में खरीद लिए। साथ ही उसका साल भर का मोबाइल  रिचार्ज करा दिया।

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जमशेदपुर की रहने वाली 11 साल की  तुलसी को online लाइन क्लास के लिए स्मार्ट फोन चाहिए था। अपनी पढाई होती रहे इसके लिए बागानों से लाकर आम बेचने शुरू किया। लेकिन कुछ आमों के बिकने से स्मार्ट फोन के लिए पैसे जमा नहीं हो पाते। पर उसने हिम्मत नहीं हारी । वह रोज स्ट्रटे माइल्स रोड के किनारे आमों की टोकरी लाकर बेचती रही। आखिर  एक मुम्बई के  खरीदार को यह पता चला कि  लॉक डाउन के कारण  तुलसी की पढ़ाई नहीं हो पा रही है तब उसने सोशल मीडिया में तुलसी के बारे में लिखा।

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 मुम्बई के एक व्यापारी  वैलुएबल  एडुटेमनेर  प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अमेया हेते  ने बच्ची की पढ़ाई की जूनून को महसूस किया । और उसकी मदद के लिए हाथ हाथ आगे बढाए । बच्ची के अंदर स्वाभिमान बना रहे इसके लिए उसने तुसली से 12  आम खरीदे लेकिन हर आम के लिए दस हजार रुपए दिए। यानी बारह आम के डेढ़ लाख रुपए दिए । तुलसी ने इससे मोबाइल लिया। अमेया हेते ने पूरे साल की पढ़ाई के लिए बच्ची का मोबाईल रीचार्ज करवा दिया है ।

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 तुलसी के परिवार वालों ने तुलसी के नाम पर 80 हजार रुपए फिक्स डिपोजिट किया ताकि आगे उसके पढाई में किसी तरह की दिक्कत न आए। इस मदद से तुलसी का पढाई जारी रखने का सपना पूरा हुआ है। वह अब आम नहीं बेच रही है। बल्कि उसने घर पर रहकर पढाई करनी शुरू कर दी है।

Author: admin

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