मजदूरी को मजबूर महिला खिलाडी

मजदूरी को मजबूर महिला खिलाडी

आर सी ढौंडियाल

बिहार आज भी अपनी रूडिबादी सोच से बाहर नही निकल पाया है….यहाँ के लोग आज भी लड़के और लड़कियों में फर्क समझते हैं।आलम ये है कि 20 वी सदी में भी लड़कियों को घरों से बाहर नहीं निकलने दिया जाता है लेकिन इसके बाबजूद भी कैमूर जिले के एक छोटे से गांव की पूनम यादव ने जिले में लड़कियों के लिए व्यामशाला नहीं होने के बाद भी चार बार नेशनल और 7 बार स्टेट में कुश्ती प्रतियोगिता में हिस्सेदारी कर चुकी हैं। और कई बार मेडल भी जीत चुकी है लेकिन आज सरकार की बेरुखी के चलते मजदूरी करने पर विवश है।

कैंमूर जिले के राष्ट्रीय दंगल खिलाडी पूनम यादव दंगल छोड़ आज मजदूरी करने को विवश है। लॉकडाउन के कारण पिता ने ट्रक ड्राइवर छोड़ दी तो बेटी  पूनम ने परिवार पालने का जिम्मा खुद अपने कँधों पर ले लिया और लग गई मजदूरी पर और अपने घर का खर्चा चलाने लगी । पूनम यादव कैमूर जिले के सहूका गांव की रहने वाली है। पिता ड्राइवर की नौकरी करते थे जब लॉकडाउन लगा तो पिता नौकरी छोड़कर घर पर बैठ गए। भाई बहनों में सबसे बड़ी पूनम ने खुद परिवार पालने का बीडा उठा लिया ।

4 बार नेशनल और 7 बार स्टेट में खेल चुकी पूनम यादव ने उस वक्त ये कामयावी हाशिल की थी जब कैमूर जिले में लड़कियों के लिए एक भी व्यामशाला नहीं थी बावजूद इसके पूनम यादव ने इतना बडा मुकाम हाशिल किया हैं लेकिन आज उनके परिवार की माली हालत ठीक ना होने के चलते अपने परिवार के खातिर पूनम को मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड रहा है।लेकिन इसके बावजूद भी पूनम पूनम के हौसले को सलाम करने का मन करता है क्योंकि परिवार की खराब माली हालत के बावजूद भी पूनम सरकार से  अपने लिए कुछ नहीं माँग रही हैं .. माँग रही हैं तो इलाके की लडकियों के लिए व्यामशाला जिनकी बजह से लड़कियां भी बिहार का नाम रोशन कर सकें अपने समय में वो खुद प्रैक्टिस के लिए साइकिल से 15 किलोमीटर दूर बिछिया मे बने लड़कों की व्यामशाला में कुश्ती सीखने जाती थी जहां पर उसके मामा कोच थे उसको कुश्ती सिखाते थे। पूनम गोल्ड मेडल भी जीत चुकी हैं । अगर मदद मिले तो वो अब भी दंगल खेलना चाहती हैं  कुश्ती के लिए उनका जुनून तो देखिए इन हालातों में भी वो अपने भाई के साथ छत पर कुश्ती प्रैक्टिस करती हैं

      आमिर खान की दंगल फिल्म में हमारे देश में महिला कुश्ती के हालातों को जिस अंदाज में दिखाया गया है वो इस बात की तस्दीक करता है कि आज भी अपने देश में महिला कुशती का भविष्य अधर में है….बिहार की पूनम यादव कुश्ती में नेशनल में खेलने के बावजूद भी आज मजदूरी करने को मजबूर है ये संदेश है उन सरकारों के लिए भी जो दावा करती है कि उनके राज में खेलों को खूब बढावा मिल रहा है… तो फिर पूनम यादव मजदूरी क्यों कर रही हैं…..

KHABARDAR Express...

Author: admin

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