Sunday, May 9, 2021
Dark black and orange > World News > Recent News > तो लामा एंटीबॉडी खत्म होगा कोरोना- वैज्ञानिकों का दावा

तो लामा एंटीबॉडी खत्म होगा कोरोना- वैज्ञानिकों का दावा

खबरदार ड़ेस्क

कोरोना वायरस महामारी से दुनिया को बचाने  के लिए पूरी दुनियाभर के वैज्ञानिक और शोधकर्ता अपना दिन रात एक करके वैक्सीन की खोज में जुटे हुए हैं. हालांकि अभी तक किसी भी देश को  खास सफलता हासिल नहीं हुई हैं, लेकिन इस बीच शोध में पाया गया है कि कोरोना वायरस को रोकने में इनहेल्ड लामा एंटीबॉडी कोरोना के इलाज में मददगार हो सकते हैं

6 नवंबर को अमेरिका के वॉशिंगटन में वैज्ञानिकों ने लामाओं से छोटे लेकिन सबसे ज्यादा ताकतवर कोरोना वायरस एंटीबॉडी सेल्स को निकालने की एक नई विधि खोज निकाली है. उनका कहना है कि COVID-19 को रोकने और इसके इलाज करने की इसकी ताकत के साथ इनहेलेबल थैरेप्यूटिक्स को इस्तेमाल में लाया जा सकता है.

अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग (स्कूल ऑफ मेडिसिन) के शोधकर्ताओं माने तो, ये विशेष लामा एंटीबॉडी, जिनको नैनोबॉडी कहा जाता है,  इनसान की एंटीबॉडी से बहुत ही छोटी हैं. उन्होंने कहा कि SARS-CoV-2 वायरस को बेअसर करने में ये कई गुना अधिक असरकारी हैं, जो बाद में कोरोना वायरस संक्रमण की बजह बनता है.

गुरुवार को साइंस जर्नल में छपे एक अध्ययन में वरिष्ठ लेखक यी शी ने कहा, “प्रकृति हमारा सबसे अच्छा आविष्कारक है.” उन्होंने कहा, “हमने जिस तकनीक का सर्वेक्षण किया, उसमें एसएआरएस-सीओवी -2 ने हमारी उम्मीदों से कुछ ज्यादा ही नैनोबॉडी को बेअसर कर दिया था, जिससे हमें हजारों नैनोबॉडी की खोज करने की जानकारी मिली.

शोधकर्ताओं ने वैली नाम की काली लामा को SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन के एक टुकड़े के साथ प्रतिरक्षित किया और, लगभग दो महीने के बाद, पशु की इम्युनिटी प्रणाली ने वायरस के खिलाफ परिपक्व नैनोबॉडी का उत्पादन कर दिया.

शी की प्रयोगशाला में एक शोध सहायक युफेई जियांग ने मास स्पेक्ट्रोमेट्री- बेस्ड़ तकनीक का उपयोग करते हुए वैली के रक्त में नैनोबॉडी की पहचान की जो एसएआरएस-सीओवी -2 से सबसे अधिक मजबूती से जुड़ते हैं. वैज्ञानिकों ने तब SARS-CoV-2 वायरस को जीवित करने के लिए अपने नैनोबॉडी को एक्टिव किया और पाया कि एक नैनोग्राम के एक अंश से एक लाख कोशिकाओं को संक्रमित होने से बचाने के लिए भरपूर है और इससे वायरस को बेअसर किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि नैनोबॉडी कमरे के तापमान पर छह सप्ताह तक एक्टिव रह सकती है. एंटीवायरल थैरेपी को सीधे फेफड़ों में पहुंचाने के लिए इनहेबल मिस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है.चूंकि SARS-CoV-2 एक सांस से संबंधित वायरस है, नैनोबॉडीज श्वसन प्रणाली में इसे खोज कर निकाल सकते हैं और इससे पहले कि वो नुकसान पहुंचाए उन्हें खत्म किया जा सकता है. शी ने कहा,  इन “नैनोबॉडी की खास बात ये है कि ये बहुत कम खर्च पर लोगों को उपलब्ध हो सकते हैं. आज के हालातों को देखते हुए  इस घोर संकट के बीच इस खोज से कोरोना के इलाज में हमें खास सफलता मिल सकती

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *