Sunday, May 9, 2021
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तो, उत्तराखंड़ में “कोरोना” के खातिर पतियों को छोड़ रही हैं, पत्नियाँ

आर सी ढौड़ियाल

उत्तराखंड़ में कोरोना का असर रिश्तों पर भी भारी पड़ रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य महिला ऐच्छिक ब्यूरो में पति- पत्नि के अलग होने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं …. लॉकडाउन में पति की नौकरी जाने के बाद पत्नियां खर्च न मिलने की दलीलें दे कर अपने पति का साथ छोड़ रही हैं। महिलाओं ने यह भी बहाना ढूंढ लिया है कि जब कोरोना महामारी ठीक हो जाएगी, तब ही वो ससुराल जाएंगी। आलम ये है कि पिछले छै महीनें में करीब 180 परिवारों पर कोरोना महामारी से ज्यादा परिवार टूटने का खतरा मंड़रा रहा है। ब्यूरो के पास इनमें से सबसे ज्यादा केस साल 2018-19 में हुई शादियों के हैं।

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लॉकडाउन में पति का नौकरी जाने के बाद पत्नियां खर्च न मिलने की दलीलें दे कर अपने पति का साथ छोड़ रही हैं। महिलाओं ने यह भी बहाना ढूंढ लिया है कि जब कोरोना महामारी ठीक हो जाएगी, तब ही वो ससुराल जाएंगी। कोरोना के चलते इन दिनों कई निजि कंपनियों अपने कर्मचारियों को निकाल रही हैं  इसकी बजह से उत्तराखंड़ में नैनीताल जिले के करीब 180 परिवार टूटने की कगार पर पहुंच चुके हैं। हल्द्वानी कोतवाली स्थित महिला ऐच्छिक ब्यूरो के रिकार्ड के मुताबिक यहां पर जून से अब तक 180 से अधिक मामले आ चुके हैं। हलाँकि इनमें से 60 फीसदी महिलाएं  अब सशर्त अपने ससुराल लौटने को मान गईं हैं। लेकिन उनकी जिंद है कि वो पति की नौकरी लगने के बाद ही सुसराल वापस आएंगी। इसके अलावा कुछ महिलाओं ने यह भी बहाना ढूंढ लिया है कि जब कोरोना महामारी ठीक हो जाएगी, तब ही वो ससुराल जाएंगी। लेकिन इस मामले में सबसे बड़ी चौकाने वाली बात ये है  बाकी महिलाएं कोर्ट की शरण में जाकर पति से खर्चा लेने की बात कहकर चली गईं है और उन मामलों में अब मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इसके अलावा अभी इसी तरह के करीब 50 केस नए आए हैं, जो पेंडिंग पड़े है, उनको अब ऐछिक ब्यूरो तारीख देकर बुलाया जा रहा है।

लॉकडाउन में पति का नौकरी जाने के बाद पत्नियां खर्च न मिलने की दलीलें दे कर अपने पति का साथ छोड़ रही हैं। महिलाओं ने यह भी बहाना ढूंढ लिया है कि जब कोरोना महामारी ठीक हो जाएगी, तब ही वो ससुराल जाएंगी।2018-2019 में शादी करने वालों की ज्यादा शिकायतें, महिला ऐच्छिक ब्यूरो की माने तो साल 2018-2019 में जिनकी शादी हुई थी, उनकी  ही ज्यादा शिकायतें हैं। दरअसल शादी के बाद घूमने फिरने की ख्वाइस पाले बैठी लड़िकियों के लिए ये बात किसी सपने तोड़ने जैसा है क्योंकि उन्होंने लम्बे समय से ख्वाब पाले बैठी थी कि शादी के बाद वो अपने पति के साथ कई जगहों पर घूमने फिरने जायेंगी लेकिन मौज मस्ती का का सपना पाले इन महिलाओं के रास्तों पर कोरोना ने ब्रेक लगा दिया है।  अपनी नौकरी जाने से दुखी पतियों पर दोहरी मार पड़ी है। ये महिलाएं अपने पति से अलग होने के लिए हेल्पलाइन और थानों में तहरीर दे रही हैं। बच्चों वाली महिलाएं भी लॉकडाउन में ससुराल से ज्यादा मायके में ही रहना पसंद कर रही हैं।

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लॉकडाउन में पति का नौकरी जाने के बाद पत्नियां खर्च न मिलने की दलीलें दे कर अपने पति का साथ छोड़ रही हैं। महिलाओं ने यह भी बहाना ढूंढ लिया है कि जब कोरोना महामारी ठीक हो जाएगी, तब ही वो ससुराल जायेगी, हल्द्वानी में ऐच्छिक ब्यूरो प्रभारी विजया की माने तो उनका काम तो केवल परिवार के झगड़े निपटाकर लोगों के घरों को कैसे बसाया जाए इस बात का ध्यान रखना है। लेकिन जो नहीं मानते है तो उस मामले का हम केस दर्ज कर देते हैं। और आगे वैधानिक कार्रवाई के बाद जो भी निर्णय आता है उसी के हिसाब से काम किया जाता है

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लॉकडाउन में पति का नौकरी जाने के बाद पत्नियां खर्च न मिलने की दलीलें दे कर अपने पति का साथ छोड़ रही हैं। महिलाओं ने यह भी बहाना ढूंढ लिया है कि जब कोरोना महामारी ठीक हो जाएगी, तब ही वो ससुराल जाएंगी।  ये बात  सही है कि कोरोना महामारी की बजह से आज हिन्दुस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया परेशान है और खौफ से साये में जी रही है, लेकिन बजाय इस बीमारी का मिलजुलकर मुकाबला करने के नये शादीशुदा जोड़ों का इसकदर चंद पैसों के लालच में अपना घर तोड़ना जायज नहीं ठहराया जा सकता है, कहते हैं कि इंसान को परेशानी के वक्त अपने अपनों का साथ चाहिए होता है ताकि किसी भी दिक्कत को मिलजुलकार नपटाया जाय लेकिन जब संकट की घड़ी में अपना जीवल साथी ही दगा दे देगा तो इंसान का मुशीबत से पार पाना और भी कष्टकारी हो जाता है आज के हमारे नौजवान युवक और युवतियों को ये जरुर सोचना और समझना होगा कि जिस जीवन साथी के साथ शादी के वक्त हर सुख-दुख में साथ देनें की हमनें कसमें खायी थी वो कसमें परेशानी की इस घड़ी में कैसे टूट सकती है, आज हमारे समाज को भी सोचना होगा कि शादी का बंधन महज मौज मस्ती और सैर सपाटे के लिए नहीं है बल्कि ये हमारी संस्कृति है इसको कैसे बचाया जाय इस बारे में गम्भीरता से बिचार करना होगा

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