ड्रैगन फ्रूट की खेती, किसानों को बना रही मालामाल

 भारत(India) में खेती( Farming) बेहद पारम्परिक तरीके से की जाती है इसीलिए शायद छोटे किसानों( farmers) को इतना फायदा (profit) नहीं होता जितना की बड़े किसानों को होता है लेकिन अगर छोटे किसान पारम्परिक खेती से अलग हटकर बदलते वक़्त के साथ नए तरीकों9 techniques) से नई खेती करेंगे तो कम ज़मीन में भी वो अधिक मुनाफा( Profit) कमा सकते है और यही बात साबित की है गुजरात के भावनगर के रहने वाले रमेश मकवाना ने ड्रैगन फ्रूट( Dragon Fruit) की खेती करके।

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 भारत(India) एक खेती( Agriculture) प्रधान देश है जहा करीब 58 प्रतिशत( Percentage) लोग आमदनी के लिए सीधे तोर पर खेती पर निर्भर करते है, उन्ही में से एक है गुजरात के भावनगर के रहने वाले रमेश मकवाना। रमेश किसान परिवार से ताल्लुक रखते है। वे पहले से पारंपरिक खेती कर रहे हैं। हालांकि, इसमें ज्यादा आमदनी नहीं थी। परिवार का खर्चा मुश्किल से ही चल पाता था। दो साल पहले उन्हें सोशल मीडिया पर ड्रैगन फ्रूट के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने इसके बारे में और जानकारी जुटाने की कोशिश की। इससे जुड़े कई वीडियो यूट्यूब पर देखें। कुछ दिनों बाद उसे एक परिचित से पता चला कि जामनगर में इसकी अच्छी खेती होती है। इसके पौधे भी वहीं मिलेंगे।

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इसके बाद रमेश जामनगर( Gujrat, jamnagar) चला गया। वहां के किसानों से मुलाकात की और इसकी खेती की प्रक्रिया को समझा। फिर वहां से 48 रुपये प्रति पौधे की दर से 700 पौधे लाए। रमेश कहते हैं कि मेरे पास करीब 6 एकड़ कृषि भूमि है। इसमें से 2.5 एकड़ जमीन पर मैंने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। क्योंकि मेरे मन में यह भी डर था कि अगर फसल ठीक नहीं हुई तो जमीन खराब हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पहले साल अच्छी फसल हुई थी। करीब 15 महीने बाद इसने फल देना शुरू कर दिया। रमेश बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट की खेती के करीब 15 महीने बाद फल आने लगते हैं। हालांकि उत्पादन ज्यादा नहीं है। क्योंकि अभी पौधे पूरी तरह से परिपक्व नहीं हुए हैं। इस साल पहली बार मेरे खेत से फल निकलने लगे, इसलिए लोग स्थानीय बाजार के साथ बाहर से भी लोग खरीदारी के लिए आए। एक फल की कीमत 150-250 रुपये के बीच होती है। फिलहाल मैं राजस्थान ( rajasthan)मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों( state) में सोशल मीडिया के जरिए इसकी मार्केटिंग कर रहा हूं। मैंने इस सीजन में करीब 7.5 लाख का बिजनेस किया है। यानी मैंने पहले साल में ही 3.5 लाख का डायरेक्ट प्रॉफिट कमाया है। जो परंपरागत खेती में संभव नहीं था।

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भारत में 58% लोग आमदनी के लिए खेती पर निर्भर

ज्यादातर की जाती है पारंपरिक खेती

रमेश भी पहले करते थे पारंपरिक खेती

सोशल मीडिया( Social Media) पर ड्रैगन फ्रूट के बारे में पता चला

एक फल की कीमत( Price) 150-250 रुपये के बीच

पहले साल में ही 3.5 लाख का प्रॉफिट

उगा रहे है तीन तरह के ड्रैगन फ्रूट

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रमेश फिलहाल तीन तरह के ड्रैगन फ्रूट उगा रहे हैं। इसमें गुलाबी, सफेद और लाल पौधे शामिल हैं। हर पौधे की खूबसूरती अपने आप में खास होती है। उनका कहना है कि इसकी खेती में कारोबार की अच्छी गुंजाइश है। भावनगर जिले के अवनिया, तलजा, दिहोर, ट्रैपज, सीहोर और पलिताना गांवों में ड्रैगन फ्रूट की खेती की जा रही है। उनके अनुसार पहले दो से तीन साल में ज्यादा कमाई नहीं होती है, लेकिन जब पौधे पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं तो उत्पादन अच्छी मात्रा में होता है और अच्छी खासी कमाई होती है. रमेश ने इसकी खेती के जरिए कई स्थानीय किसानों को रोजगार से भी जोड़ा है।

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पहले यह माना जाता था कि भारत में ड्रैगन फ्रूट की खेती नहीं की जा सकती है। यह अमेरिका, वियतनाम, थाईलैंड जैसे देशों से भारत आता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से भारत में भी इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है। गुजरात इसका हब है। यहां सरकार ने इसका नाम कमलम रखा है। इसके अलावा यूपी, एमपी, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी इसकी खेती की जा रही है। ड्रैगन फ्रूट के पौधे बरसात के मौसम को छोड़कर पूरे साल लगाए जा सकते हैं। रोपण मार्च से जुलाई के बीच सबसे अच्छा किया जाता है।

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अगर आप खेती के साथ ही इसकी नर्सरी लगाते हैं और प्रोसेसिंग का काम करते हैं तो और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। आज-कल बड़े लेवल पर इसकी प्रोसेसिंग( Processing) के बाद सॉस, जूस, आइसक्रीम( ice cream) जैसे प्रोडक्ट बनाए जा रहे हैं।

Author: admin

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