Sunday, May 9, 2021
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जल प्रलय का विज्ञान

उत्तराखंड़ के तपोवन में आयी जल प्रलय किस बजह से आयी इस बारे में अभी तस्वीर साफ नहीं हुई है आपदा के तीन दिन बाद भी सरकार से लेकर आम जनता इस प्रलय की असल बजह से वाकिफ नहीं हो पाई है भू-वैज्ञानिकों की टीम भी मौके पर पहुँच चुकी हैं और इस आपदा की असली बजह ढूड़ने की कोशिश में लग गई हैं, कई भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि ये आपदा कहीं न कहीं विधुत परियोजनाओं की आड़ में पहाड़ो पर हो रहे अत्याधिक दोहन से इस तरह की घटनाएं हो रही हैं क्योंकि जिस इलाके में ये जल प्रलय आई है उस इलाके में दूर दूर तक कोई भी ग्लेशियर नहीं हैं ऐसे में ग्लेशियर को इस आपदा की असल बजह नहीं माना जा सकता है वैज्ञानिकों का मानना है कि इस्सरो से भी इलाके की जो तस्वीरें मिली हैं वो चौकाने वाली हैं इन तस्वीरों में दूर दूर तक ग्लेशियर नजर नहीं आ रहे हैं एसे में ग्लेशियर को ही इस प्रलय के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है साथ ही वैज्ञानिक तो यहाँ तक कह रहे हैं कि उत्तराखंड़ की सभी झीलों की मैपिंग की जानी चाहिए ताकि जो झील कमजोर हो या टूट की कगार पर पहुँच चुकी हो उसका समय रहते रिपेरिंग का काम किया जा सके

यूजेवीएन और केन्द्रीय जल आयोग के सहयोग से बाढ़ और आपदा में बांधों को पहुंचने वाले नुकसान की संभावना को दूर करने को आपातकालीन कार्य योजना कैसे तैयार हो, इस पर ऑनलाइन बैठक हुई। बैठक में विशेषज्ञों ने हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के लिए ग्लेशियरों की डीप स्टडी पर जोर दिया। नदियों के मलबे का समय पर निस्तारण पर भी जोर दिया। बैठक में एमडी यूजेवीएनएल संदीप सिंघल ने कहा कि आपातकालीन कार्य योजनाएं हमें अचानक घटी प्रलयकारी घटनाओं तथा आपदाओं का सामना करने एवं उनसे बचाव एवं सुरक्षा को तैयार करती हैं।

कहा कि बांध पुनर्वासन एवं सुधारीकरण परियोजना के तहत आपातकालीन कार्य योजना में परियोजनाओं के उपग्रह आधारित जीआईएस तकनीक के प्रयोग से ग्लेशियरों, नदियों तथा परियोजनाओं के जल संग्रहण क्षेत्रों आदि की गतिविधियों एवं स्थितियों पर पैनी नजर रखी जानी चाहिए। इससे उपलब्ध आंकड़ों का समय-समय पर समुचित अध्ययन भी किया जाना चाहिए। ताकि किसी भी अनहोनी का पूर्वानुमान समय रहते लगाया जा सके। और जान माल की सुरक्षा के उपाय किए जा सकें।

साथ ही कहा कि यूजेवीएनएल बांध पुनर्वासन एवं सुधारीकरण परियोजना (ड्रिप) के तहत आने वाले कार्यों को तत्परता से क्रियान्वित कर रहा है। बैठक में केंद्रीय जल आयोग से गुलशन राज, प्रमोद नारायण, डा. डेविड, विश्व बैंक से डॉ. चामुंघम राजगोपाल सिंह, यूजेवीएनएल निदेशक ऑपरेशन पुरुषोत्तम सिंह, जीएम पंकज कुलश्रेष्ठ, डीजीएम भरत भारद्वाज आदि मौजूद रहे।

जनता को जागरुक करने के साथ हो मॉक ड्रिल

बैठक में विशेषज्ञों ने जनता को जागरुक करने और समय समय पर मॉक ड्रिल पर जोर दिया। कहा कि संभावित दुर्घटनाओं और आपदाओं को ध्यान में रखते हुए समय समय पर माक ड्रिल करने के साथ ही सुरक्षा प्रणालियों एवं उपकरणों की जांच भी होनी चाहिए। कहा कि भविष्य में दुर्घटना होने या आपदा की स्थिति उत्पन्न होने पर आसपास के लोगों हेतु पूर्व में ही सुरक्षित स्थान चिन्हित कर आपदा के समय उन तक आसान पहुंच बनाने के उपाय भी योजना में शामिल किए जाने चाहिए।

सटीक जानकारी से भ्रम को किया जाए दूर

यह भी सुझाव दिया गया कि बाढ़ या बांधों को नुकसान होने की दशा में रेडियो, टीवी, सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों का सटीक जानकारी प्रसारित कर आम जनता में फैले भ्रम एवं डर को दूर करने में उपयोग किया जा सकता है। पूर्व में आई बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के साथ ही भविष्य में घटने वाली घटनाओं के पूर्वानुमान के आधार पर निचले क्षेत्रों की सुरक्षा एवं बचाव की कार्य योजना बनाने का सुझाव भी दिया। सुझाव भी दिए गए कि बांधों एवं अन्य संरचनाओं के नियमित अंतराल पर निरीक्षण एवं अध्ययन किए जाते रहने चाहिए।

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