Sunday, May 9, 2021
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गाँधी, पटेल और नेहरू को भूलती काँग्रेस !

रिर्पोट- राकेश ढ़ौड़ियाल

इसको इतिफाक ही कहा जायेगा कि आज 31 अक्टुबर है और आज ही सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती भी है, आज से ठीक तीन दिन पहले उत्तराखंड़ के एक पूर्व पदाधिकारी ने देहरादून पुलिस लाइन में अपने सभी नेताओं के सामने लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के साथ कुछ ऐसी हरकत कर डाली जिसकी बजह से अब काँग्रेस को इस मसले पर जबाब देते नहीं बन पा रहा है और उसके ज्यादातर नेता अब मसले पर बोलने से कन्नी काटने लगे हैं

आज से ठीक तीन दिन पहले उत्तराखंड़ के एक पूर्व पदाधिकारी ने देहरादून पुलिस लाइन में अपने सभी नेताओं के सामने लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के साथ कुछ ऐसी हरकत कर डाली जिसकी बजह से अब काँग्रेस को इस मसले पर जबाब देते नहीं बन पा रहा है और उसके ज्यादातर नेता अब मसले पर बोलने से कन्नी काटने लगे हैं

दरअसल तीन दिन पहले काँग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ राजभवन कूच करने का कार्यक्रम रखा था इस प्रदर्शन में काँग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह समेत तमाम बड़े नेताओं ने शिरकत की थी, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को राजभवन से पहले ही रोककर गिरफ्तार कर दिया और उनको पुलिस लाइन ले आये, यही पर ये पूरा वाकया हुआ काँग्रेस के एक तथाकथित नेता ने एक चैनल के बरिष्ठ संवाददाता को खबर कवर करने से रोका यही नहीं बताया जा रहा है कि इस नेता ने अपने सभी नेताओं के सामने टी वी पत्रकार को घर तक देखलेने और जान से मारने की धमकी दे डाली वो भी महज पत्रकार द्वारा खबर कवर करने के दौरान इस शक्स को थोड़ा जगह देने की माँग करने पर, अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जिस काँग्रेस के पदाधिकारी विपक्ष में इस तरह का सलूक लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ कर सकते हैं तो आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस काँग्रेस के पदाधिकारी सत्ता में होने पर एक आम आदमी के साथ किस तरह का सलूक करीगे इसका अंदाजा इस पूरे घटनाक्रम पर गौर करने पर आसानी से लगाया जा सकता है आपको बता दे ये वही काँग्रेस है जिसमें जवाहरलाल नेहरू को को दो बार अध्यक्ष बनाने के लिए सरदार पटेल गाँधी जी के कहने पर पीछे हट गये थे और बाद में आजाद भारत में भी वो पटल ही थे जो नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने के लिए सबसे चहीते उम्मीदवार होने के बावजू

उन्होंने त्याग किया और अपनी दावेदारी वापस ले ली थी लेकिन काँग्रेस के आज के ये नेता गाँधी, पटेल और नेहरू को फूल माला तो चढ़ाते है लेकिन उनके विचारों को अपनाने में  ये दूर दूर तक भी नजर नहीं दिखते हैं नही तो अपने सभी वरिष्ठ नेताओं के सामने ये नौवत नही आ सकती थी

आज से ठीक तीन दिन पहले उत्तराखंड़ के एक पूर्व पदाधिकारी ने देहरादून पुलिस लाइन में अपने सभी नेताओं के सामने लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के साथ कुछ ऐसी हरकत कर डाली जिसकी बजह से अब काँग्रेस को इस मसले पर जबाब देते नहीं बन पा रहा है

  इस मसले पर अभी तक काँग्रेस ने कोई ठोस कारवाई नहीं की है अलबत्ता उसके नेता खुलकर मीडिया में अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं हलाँकि पत्रकार का कहना है वो इस मामले में मुकदमा दर्ज करवाने वाले हैं इसकी बजह है कि पत्रकार को अपने काम करने से रोकना अपने आप में अपराध है और पूर्व में कोर्ट तक सरकारों को कह चुका है साथ ही किसी को धमकी देना भी अपराध की ही श्रेणी में आता है, अब देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में आगे पुलिस क्या कारवाई करती है क्योंकि पूरा मामला देहरादून पुलिस लाइन के अंदर का है

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