Sunday, May 9, 2021
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क्या इस बार आर पार के मूड़ में हैं हरदा ?

खबरदार डेस्क

KHABARDAR Express...

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए अभी एक साल से ज्यादा का वक्त बचा है..इधर उत्तराखंड में चुनाव से पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने चुनावी जंग के लिए सेनापति यानि मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की डिमांड कर दी है ..ताकि जनता जान सके कि प्रदेश में कांग्रेस का नेता कौन है..उधर हरदा की बात ने रफ्तार पकड़ ली है..धड़ो में बटी प्रदेश कांग्रेस में फिर से तूफान आ गया है..और हरदा फिर से हैवीवेट दिखाई दे रहे हैं

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इस बार आर पार के मूड़ में हरदाबात निकली है तो दूर तलक जाएगी..ये उसी वक्त तय हो गया था जब हरीश रावत ने अपने जज्बात सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर जाहिर किए थे..और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए चेहरा घोषित करने की बात कही थी.. कांग्रेस के लिए हरदा की बात धीरे से दिए गए जोर के झटके से कम नहीं….. मीडिया ने कुरेदा तो हरदा ने विपक्ष की राजनीति के तरीके और राज्य में कांग्रेस की सेहत का हवाला दे दिया हलाँकि हरदा का असली दर्द कुछ और ही है लेकिन दूर की सियासत में माहिर हरदा ने पार्टी के चेहरे की बात उछालकर एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि पार्टी में हरीश रावत खेमा उनको राजनीति से संयास दिलाना चाहता है और उनको जैसे बीजेपी ने लाल कृष्ण आडवाणी को संरक्षक मंडल में डाल दिया था कुछ इसी तरह हरदा विरोधी भी उनको संरक्षक मंड़ल में डालना चाहते हैं इसके साथ ही हरदा भी सियासत के पक्के खिलाड़ी हैं वो भी पूर्व की तरह इस बार गच्चा नहीं खाना चाहते है क्योकि सब जानते हैं कि साल 2002 में काँग्रेस पार्टी को उत्तराखंड़ में सत्ता दिलानेवाले हरदा ही थे लेकिन एनमौके पर काँग्रेस आलाकमान ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर तिवारी जी को बिठा दिया था उसके बाद साल 2012 में भी हरदा का नाम मुख्यमंत्री के लिए सबसे आगे था लेकिन

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आलाकमान ने विडय बहुगुणा पर भरोसा जताया था यानि गर्म दूध से जले हरदा इस बार कोई चूक करने के मूड़ में नहीं है इसीलिए चुनाव से पहले चेहरा घोषित करने की माँग कर रहे हैं क्योकि हरदा जानते हैं कि ये काँग्रेस है यहाँ चुनाव के बाद कुछ भी हो सकता है ऐसे में पहले से ही चेहरा घोषित रहेगा तो उनको पार्टी के लिए काम करने में आसानी रहेगी अगर देखा जाय तो उत्तराखंड़ में अगर काँग्रेस का कोई चेहरा इस वक्त बीजेपी को अगर कोई टक्कर दे सकता है तो वो सिर्फ हरदा हैं इसलिए हरदा चाहते हैं जब वो पार्टी को जिताकर लायेगे तो मुखिया भी उन्हीं को बनाया जाना चाहिए

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उत्तराखंड में विधान सभा के लिए एक साल से ज्यादा का वक्त बाकी है.. लेकिंन हरदा जैसी पारखी नजरों के लिए ये वक्त इतना ज्यादा नहीं कि, पार्टी की चादर से… गुटों में बटी कांग्रेस की सलीके से पोटली बनाई जा सके..दरअसल देखा जाए तो साल 2017 के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से कांग्रेस अब तक उबर नहीं पाई है…ऊपर से राज्य में पार्टी की मौजूदा कैप्टनशिप से हरदा नाराज भी हैं..जिसका वो मीडिया से जिक्र भी कर चुके हैं

हरीश रावत का पोर्टफोलियो देखा जाए तो खुद को राज्य में कांग्रेस का तीरंदाज मानने वाले मौजूदा दिग्गजों से काफी स्ट्रांग है..हरदा केंद्र में कई मंत्रालय संभाल चुके हैं जबकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रहे हैं..वहीं संगठन के कई अहम पदों पर भी रहे हैं..राज्य गठन के बाद जब राज्य में कांग्रेस की पहली निर्वाचित सरकार बनी थी उस वक्त हरीश रावत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे..बहरहाल सियासत के तराजू में हरदा की बात को उनके अऩुभव का वजन मिलने लगा है

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कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव के आने के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में हलचल हुई है..तो गुटबाजी भी खुलकर सामने आने लगी हैं.. उनके दौरे और सीधे संवाद से बहुत सी बातें उनके सामने आ गई हैं..सूत्रों की माने तो प्रदेश प्रभारी कांग्रेस के मौजूदा हालात से खुश नहीं हैं..और संगठन में धड़ेबाजी को लेकर उनके तेवर भी कड़े दिखाई दिए..एक गुट का मानना है कि प्रदेश प्रभारी को गलत फीडबैक दिया जा रहा है..और हरदा जैसे अनुभवी शख्स को किनारे करने पर तुले हैं..

बहरहाल हरदा के बड़े इजहार के बाद अब एक धड़ा हरदा के पक्ष में खुलकर आ गया है तो दूसरा धड़ा चुनाव से पहले सेनापति का चेहरा घोषित करने की मांग को कांग्रेस की परंपरा के खिलाफ बता रहा है..

सूबे में कांग्रेस के मौजूदा कप्तान की टीम के कई सदस्य बेशक कांग्रेस की परंपरा का हवाला दे रहे हों… लेकिन हरदा ने अपनी बात का वजन बढ़ाने के लिए कांग्रेस के पिछले इतिहास का जिक्र भी किया है… कि कांग्रेस ने कब-कब चुनावी जंग में उतरने से पहले सेनापति का ऐलान किया

बहरहाल हरदा के राग को सुर मिलने लगे हैं..साथ ही हरीश रावत के तेवरों से साफ हो गया है कि हरीश रावत मौजूदा प्रदेश नेतृत्व से खुश नहीं हैं और इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ना चाहते हैं..ताकि चुनावी जंग से पहले गुटों में बंटी कांग्रेस की उंगलियों को पंजा बनाया जा सके..ऐसे में माना जा रहा है अगर पार्टी आलाकमान ने हरीश रावत की बात को तरजीह दी तो उत्तराखंड में कांग्रेस का कप्तान बदला जा सकता है और हरीश रावत या उनके पसंदीदा शख्स को पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है..होगा क्या ये तो वक्त ही बताएगा बहरहाल सियासी गलियारे में कयासों का दौर जारी है और हरदा कांग्रेस में जान फूंकने और अपना रिपोर्टकार्ड मजबूत करने के लिए सूबे के ताबडतोड़ दौरे कर रहे हैं

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