Sunday, May 9, 2021
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कुदरत ( Nature) को ऐसे भी बचाया जा सकता है, मुख्तार अली से सीखो पर्यावरण (Environment) को बचाना

उत्तराखंड के उद्धमसिंह नगर जिले के बाजपुर कस्बे के एक शक्स मुख्तार अली ऐसे भी हैं जो वन्यजीवों (Wild life) खासकर साँपों( Snacks) को बचाने के लिए अपना रात-दिन एक किये हुए हैं, खासकर वह विलुप्त हो रही साँपों की नश्ल को बचाने के लिए काम करते हैं। आजकल कुछ लोग भले ही कुदरत और जंगली जानबरों के दुश्मन बनें हो, लेकिन इस बात को झूठा साबित कर रहे हैं बाजपुर के  मुख्तार अली जो वन्यजीवों को बचाने के लिए अपना दिन- रात एक किये है। सुकून देने वाली बात ये है कि ये काम वो पैसों के लिए नहीं बल्कि विलुप्त हो रही सापों की नश्ल को बचाने के लिए करते हैं।

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उत्तराखंड के उद्धमसिंह नगर जिले के बाजपुर कस्बे के एक शक्स मुख्तार अली ऐसे भी हैं जो वन्यजीवों (Wild life) खासकर साँपों( Snacks) को बचाने के लिए अपना रात-दिन एक किये हुए हैं, खासकर वह विलुप्त हो रही सापों की नश्ल को बचाने के लिए काम करते हैं।
सांप जितने विषैले होते हैं लेकिन इनका होना कुदरत के लिए के लिए बेहद जरूरी है। कुदरत के चक्र को चलाने के लिए हर जीव की अपनी खासी अहमियत है लेकिन  आजकल इंसान इस प्रकृति के चक्र को तोड़ने के लिए लगातार नए-नए हथकंडे अपना रहा है। यही बजह है कि आज धरती से साँपो की प्रजातियां विलुप्ति की कगार तक पहुच चुकी है।  इसकी  बजह है अक्कसर लोग सांपों को देखते ही उनकी हत्या कर देते है। लेकिन सांपों की विलुप्त हो रही प्रजातियों को बचाने के लिए बाजपुर के केलाखेड़ा के मुख्तार अली ने बीड़ा उठाया है। बता दें कि लगातार जंगलों पर चल रही आरिया वन्यजीवों को उनके घरों से बेघर करने का काम कर रही हैं। यही कारण है कि वन्य जीव अब शहरी क्षेत्रों में दखल देने लगे हैं। । विलुप हो रही साँपो की प्रजातियों को बचाने के लिए मुख्तार अली द्वारा निशुल्क कार्य किया जा रहा है। जिसके चलते मुख्तार अली लोगो के घरों और आसपास के क्षेत्रों से जहरीले साँपो को पकड़कर उन्हें जंगल में छोड़ने का काम कर रहे है  साथ ही लोगो से साँपो की विलुप्त हो रही प्रजातियों को बचाने की अपील भी करते है।

उत्तराखंड के उद्धमसिंह नगर जिले के बाजपुर कस्बे के एक शक्स मुख्तार अली ऐसे भी हैं जो वन्यजीवों (Wild life) खासकर साँपों( Snacks) को बचाने के लिए अपना रात-दिन एक किये हुए हैं, खासकर वह विलुप्त हो रही सापों की नश्ल को बचाने के लिए काम करते हैं।

आपको बता दें कि मुख्तार अली पिछले 10  सालों से साँपो की प्रजातियों को बचाने का  काम कर रहे है। गौरतलब है कि मुख्तार अली एक महीनें में करीब 100 साँपो को लोगो के घरों से पकड़कर जंगल मे छोड़कर आते है। इसी के चलते आज भी मुख्तार अली ने 9 जहरीले साँपो को  पकड़कर जंगल में छोड़ा है।  इनमें भारतीय प्रजाति का सबसे जहरीला साँप इंडियन क्रेक…. जिसे साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है, उनकी माने तो आज लोग जहरीली दवाइयों को बनाने के लिए साँपो को मार रहे है

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उत्तराखंड के उद्धमसिंह नगर जिले के बाजपुर कस्बे के एक शक्स मुख्तार अली ऐसे भी हैं जो वन्यजीवों (Wild life) खासकर साँपों( Snacks) को बचाने के लिए अपना रात-दिन एक किये हुए हैं, खासकर वह विलुप्त हो रही सापों की नश्ल को बचाने के लिए काम करते हैं। कहते हैं कि, अगर आपके अंदर कुछ अच्छा करने का जजबा हो तो नेक काम कभी भी और कैसा भी किया जा सकता है, बाजपुर के मुख्तार अली ने इस बात को हमें अच्छी तरह से समझा दिया है, अक्कसर जिस साँप का नाम लेते ही लोगों के जेहन में शिहरन दौड़ जाती है मुख्तार आज उसी को बचाने में जुटे हुए है अब उम्मीद की जानी चाहिए कि दूसरे पर्यावरण प्रेमी भी मुख्तारसे सीख लेंगे

बाजपुर से शुभम गम्भीर की रिर्पोट

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