Sunday, May 9, 2021
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कुंभ से पहले पट्टाभिषेक को लेकर संतो में घमासान

खबरदार डेस्क- हरिद्वार

निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर पद पर होने वाले पट्टाभिषेक कार्यक्रम पर विवाद गहराता जा रहा है। जयपुर से हरिद्वार पहुँचे प्रज्ञानानंद महाराज ने खुद को निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर होने का दावा करने के साथ ही न्यायालय की शरण लेने की बात कही है। सप्तर्षि आश्रम में उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में एक बार फिर दावा किया है कि कई धर्माचार्यो की मौजूदगी में 13 मार्च 2019 को काशी में उनका पट्टाभिषेक कर निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर पद पर आसीन किया गया था। लेकिन अखाड़े के कुछ संत एक योग्य व्यक्ति कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज को आचार्य महामंडलेश्वर पद पर बैठाना चाहते हैं लेकिन वह ऐसा होने नहीं देंगे और 14 जनवरी को होने वाले पट्टाभिषेक कार्यक्रम को रोकने के लिए न्यायालय की शरण लेने जा रहे हैं।

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संत स्वामी प्रज्ञानंद जी महाराज

कुंभ से पहले पट्टाभिषेक को लेकर संतो में घमासान

प्रज्ञानानंद महाराज ने सोमवार को हरिद्वार में एक पत्रकार वार्ता में मार्च 2019 में हुए अपने पट्टाभिषेक के फ़ोटो भी दिखाए। उन्होंने कहा कि अखाड़े के कुछ संत मिल कर एक ऐसे व्यक्ति को इस पद पर बैठाना चाहते है, जो समाजवादी पार्टी का नेता है। जो किसी अखाड़े की जमीन को कब्जा कर बैठा है। उन्होंने कहा कि वे संत महात्माओं से पूछना चाहते है कि क्या एक ऐसे व्यक्ति को आचार्य के पद पर बैठना चाहिए जो भू माफिया जैसा है। वे ऐसे अपात्र व्यक्ति को आचार्य जैसे गरिमामय पद पर नही बैठने देंगे। इस दौरान उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उनको कुछ दिनों से धमकियां भी मिल रही हैं कि वह इस मामले में दखल ना दें और पट्टाभिषेक कार्यक्रम में दखल अंदाजी भी ना करें। प्रज्ञान आनंद महाराज ने आरोप लगाया कि अखाड़ों में कुछ सीधे-संतों की षड्यंत्र के तहत हत्या तक की जा रही है, 14 जनवरी को इन सभी मामलों को उजागर करेंगे। सनातन धर्म के साधु संत और धर्म आचार्यों से उन्होंने अपील की है कि वो इस तरह का अनर्थ ना होने दें, साथ ही उन्होंने कहा कि 14 जनवरी को होने वाले पट्टाभिषेक कार्यक्रम को रोकने के लिए न्यायालय की शरण लेने जा रहे हैं। निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर पद पर आसीन होने से संबंधित नियुक्ति पत्र दिखाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि निर्णय खाने में नियुक्ति पत्र की परंपरा नहीं है।

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संत- स्वामी प्रज्ञानंद जी महाराज

कुंभ से पहले पट्टाभिषेक को लेकर संतो में घमासान

स्वामी प्रज्ञानानंद के दावो को अगर सच मान लिया जाय तो संत समाज से इस तरह के आचरण की उम्मीद नहीं की जा सकती है हिन्दू धर्म में संत समाज को काफी सम्मान के भाव से देखा जाता है अगर वही समाज अपने किसी संत के साथ अगर इस तरह का व्यवहार करता है तो निश्चित तौर पर कहीं न कहीं इससे संत समाज की छवि खराब होती है ऐसे में संत समाज और अखाड़ा परिषद को इस मामले में संज्ञान लेना होगा जिससे संत समाज की छवि खराब न हो क्योकि जो आरोप स्वामी प्रज्ञानंद ने निरंजनी अखाड़े पर लगाये हैं वो वाकई में गम्भीर किस्म के हैं

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प्रेस कॉन्फ्रेस में स्वामी प्रज्ञानंद महाराज

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