उत्तराखंड के इस फारेस्ट ऑफिसर ने वन मंत्री हरक सिंह को लिखा  पत्र,( Uttrakhand forest officer letter to forest minister Harak singh Rawat) राजनितिक दबाव में हुआ उनका  ट्रांसफर, ( Transfer on political pressure) अब की जांच की मांग  ( Demands fair Investigation in matter) देहरादून:

Khabardaar Bureau

28 December,2021

उत्तराखंड के इस फारेस्ट ऑफिसर ने वन मंत्री हरक सिंह को लिखा  पत्र,( Uttrakhand forest officer letter to forest minister Harak singh Rawat) राजनितिक दबाव में हुआ उनका  ट्रांसफर, ( Transfer on political pressure) अब की जांच की मांग  ( Demands fair Investigation in matter)

 

देहरादून:

भले ही वन मंत्री हरक सिंह रावत ने सरे कैबिनेट में अपने मंत्री पद से स्टीफ़े की घोषणा करके धामी सरकार को कुछ देर के लिए ही सही सकते में दाल दिया हो लेकिन उनके इस सियासी हत्कंडे से चुनाव के वक्त एकबार बीजेपी जरूर बैक फुट पर नजर आ रही है और चुनाव से ठीक पहले पार्टी के मंत्री के स्टीफ़े का जबाब विपक्ष को देना पार्टी को भरी पड़ रहा है वही एक बार फिर हरक की वजह से बीजेपी को असहज होना पद रहा है अबकी बार आरोप खुद हरक के विभाग के ही बरिष्ठ अधिकारी ने लगाए हैं और वो भी खुद मंत्री को चिठ्ठी लिख कर जिसमें अधिकारी ने जांच की मांग की है ऐसे में बीजेपी की मुश्किलें चुनाव के ठीकपहले हरक की बजह से बढ़ गई हैं अब पार्टी को चुनाव के समय इस मुद्दे पर विपक्ष के तीरों का सामना करना पड़ेगा और जनता को भी जबाब देना पड़ेगा जिससे पार्टी को चुनाव में होने वाले सियासी नुकसान से बचाया जा सके 

जारा आप भी पड़ें क्या शिकायत की है वन विभाग के एक अधिकारी ने वन मंत्री हरक सिंह रावत से

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 हाल ही में लैंसडाउन वन प्रभाग से हटाए गए डीएफओ दीपक सिंह की चिट्ठी ने वन विभाग में हड़कंप मचा दिया है. दरअसल चिट्ठी में दीपक सिंह ने खुद को हटाए जाने के पीछे वजह और डीएफओ रहते कई राजनीतिक दबाव और धमकियां मिलने की बात लिखी है. उधर इस आईएफएस अधिकारी पर हुई कार्रवाई और चिट्ठी सामने आने के बाद वन मंत्री हरक सिंह रावत भी सवालों के घेरे में आ गए हैं.    लैंसडाउन वन प्रभाग से वन मंत्री हरक सिंह रावत ने तत्कालीन डीएफओ दीपक सिंह पर अवैध खनन करवाने के आरोप में उन्हें वन मुख्यालय अटैच कर दिया है. वहीं, अब आईएफएस अधिकारी दीपक सिंह ने खुद को हटाए जाने को लेकर एतराज जताया है.दीपक सिंह ने मंत्री हरक सिंह का नाम लिखे बिना चिट्ठी में साफ किया है कि उन्हें राजनीतिक दबाव और धमकियां मिल रही थीं. उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में कुछ दूसरे काम रोकने के चलते भी उन्हें निशाना बनाया गया है. उन्होंने अपनी चिट्ठी में साफ किया कि उनके खिलाफ ना तो कोई जांच में तथ्य सामने आए हैं और ना ही कोई गंभीर बात कही गई है. इसके बावजूद भी उन्हें बिना तथ्यों के ही डीएफओ पद से हटाने के आदेश कर दिए गए हैं.    जाहिर है डीएफओ रहे दीपक सिंह की इस चिट्ठी के सामने आने के बाद वन विभाग में भी हड़कंप मच गया है.वन मंत्री ने भी इस मामले पर अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए साफ किया है कि न केवल इस मामले में जांच के बाद अवैध खनन होना पाया गया है और जांच टीम ने भी इसकी पुष्टि की है. इसके साथ ही उस समय डीएफओ रहे दीपक सिंह ने भी अवैध खनन होने की बात स्वीकारी है. लिहाजा कोई भी गलत आदमी खुद की गलती नहीं मानता और यही स्थिति इस मामले में भी दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि इसकी जांच के आदेश दोबारा से किए गए हैं और इसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

  महोदय,
             उपरोक्त विषयक के क्रम में अवगत कराना है कि उत्तराखण्ड शासन वन अनुभाग-1 के पत्र संख्या- 2146/X-1-2021-14 (22) टी०सी०-1 दिनांक 17-12-2021 द्वारा अधोहस्ताक्षरी लैन्सडौन वन प्रभाग, कोटद्वार के से अवमुक्त करते हुए अग्रिम आदेशों तक प्रमुख वन संरक्षक (HOFF) उत्तराखण्ड देहरादून के कार्यालय में सम्बद्ध किया गया है, उत्तराखण्ड शासन के उक्त आदेश में अघोहरताक्षरी को अपने कार्यभार से सम्बद्ध करने न तो कोई कारण उल्लेखित किया गया है और ना ही नियमानुसार कोई जॉच की प्रक्रिया पूर्ण की गयी है, परन्तु अधोहस्ताक्षरी से सम्बन्धित उक्त आदेश समाचार पत्रों में अवैध खनन का कारण बताया गया है एवं उसमें मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल), उत्तराखण्ड, देहरादून द्वारा जाँच कराये जाने की बात की गयी है। उक्त के कम में आपके संज्ञान में लाना है कि :मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) उत्तराखण्ड, पौड़ी द्वारा आपने पत्रांक-1186/21-5 दिनांक 07-12-2021 से यह उल्लेख किया गया था कि. वन प्रभाग के क्षेत्रीय नियंत्रण में शिथिलता बरती जा रही है व लापरवाही की जा रही है, जो वन सुरक्षा के दृष्टिकोण से कदाचित मान्य नहीं है, को उल्लेख करते हुए चार बिन्दुओं पर सूचना/आख्या 07 दिनों के अन्दर अधोहस्ताक्षरी से चाही गयी।

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Image-IFS, Deepak Singh

इस क्रम में अधोहस्ताक्षरी द्वारा अपने कार्यालय के पत्रांक-2215/21-5 दिनांक 11-12-2021 से स्पष्ट बिन्दुवार आख्या तैयार करते मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) उत्तराखण्ड, पौड़ी को सम्बोधित एवं वन संरक्षक, शिवालिक वृत्त, उत्तराखण्ड, देहरादून को पृष्ठांकित करते हुये उनके कार्यालय के ई-मेल एवं डाक से प्रेषित की गयी है (संलग्नक-1 ) । तदोपरान्त इस सम्बन्ध में उच्च स्तर से अन्य कोई पत्राचार नहीं किया गया और ना ही कोई जॉच की गयी।इस क्रम में यह भी उल्लेखनीय है कि अधोहस्ताक्षरी का नियंत्रक अधिकारी, वन संरक्षक, शिवालिक वृत्त, उत्तराखण्ड, देहरादून द्वारा अपने पत्रांक-1371/21-5 दिनांक 25-11-2021 से अवैध खनन सम्बन्धित विस्तृत जाँच रिपोर्ट मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल), उत्तराखण्ड, पौड़ी को प्रस्तुत की गयी। उक्त पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर शिकायत के इस प्रकरण में ऐसा कोई तथ्य प्रकाशित नहीं हुआ है, जिससे प्रभागीय चनाधिकारी, लैन्सडौन वन प्रभाग, कोटद्वार की अवैध खनन में मिलीभगत या नियंत्रण में शिथिलता परिलक्षित होती हो।   सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभागीय वनाधिकारी, लैन्सडौन वन प्रभाग, कोटद्वार द्वारा अवैध खनन को नियंत्रित करने का प्रभावी प्रयास किया गया है। आख्या के आधार पर शिकायत का निस्तारण करने की कृपा करें। अतः समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार में उल्लेखीत कारण तथ्य से परे एवं राजनीतिक दबाव से ग्रसित है।
महादेय, लैन्सडौन वन प्रभाग अतिसंवेदनशील वन प्रभाग है एवं वर्तमान में मा० वन एवं पर्यावरण मंत्री का विधानसभा क्षेत्र अन्तर्गत आता है। इस तरीके के राजनीतिक मौहाल में प्रभागीय वनाधिकारी, लैन्सडौन वन प्रभाग, कोटद्वार के पद पर अत्यन्त ही राजनीतिक दबाव, धमकियां एवं निराधार आरोपों का सामना करना पड़ता है।
एकतरफा इस प्रभाग में क्षेत्रीय स्टॉफ की अत्यंत कमी एवं राजनीतिक रूप से जुड़े होने कारण प्रभावी नियंत्रण किया जाना चुनौती पूर्ण रहा । वर्तमान में वन आरक्षियों के  है, जो  गैर कानूनी एवं अवैध कार्य न हो। जहां तक अवैध खनन की प्रश्न है, अधोहस्ताक्षरी द्वारा एस०ओ०जी० की मदद से (जो कि प्रभागीय वनाधिकारी प्रत्यक्ष नियंत्रण three है) प्रभावी कार्यवाही की गयी। विगत  में 03 डम्पर, 02 जे०सी०बी० एवं 01 पॉकलैण्ड अवैध खनन में संलिप्त वाहनों को जब्त किया गया है।

उत्तराखंड के इस फारेस्ट ऑफिसर ने वन मंत्री हरक सिंह को लिखा  पत्र,( Uttrakhand forest officer letter to forest minister Harak singh Rawat) राजनितिक दबाव में हुआ उनका  ट्रांसफर, ( Transfer on political pressure) अब की जांच की मांग  ( Demands fair Investigation in matter)

देहरादून:

प्रभाग अन्तर्गत सीमित संसाधन एवं न्यून फील्ड स्टॉफ होने के बावजूद भी इस प्रकार की कार्यवाही/प्रयास किया गया है। अतः स्थानान्तरण/ तैनाती आदेश के क्रम में मुख्यालय में सम्बद्ध किये जाने की यह कार्यवाही तथ्य से परे एवं राजनीतिक प्रतीत होता है। इस आदेश से एवं समाचार पत्रों में प्रकाशित सम्बन्धित
समाचार से अधोहस्ताक्षरी के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, इससे छवि भी धूमिल हुई है एवं अधोहस्ताक्षरी हतोत्साहित हुआ है।

महोदय,

            इस आदेश की पृष्ठ भूमि में जो कारण अधोहस्ताक्षरी को प्रतीत होता है, वह निम्नवत है: अधोहस्ताक्षरी द्वारा विगत (अधोहस्ताक्षरी  जो कि सम्भवतः राजनीतिक प्रतिनिधियों को पसंद ना आया हो)।
2  इसके उपरान्त अधोहस्ताक्षरी को धमकी दिया गया एवं तत्काल प्रभाव से सम्बद्ध किये जाने की कार्यवाही की गयी।
कैम्पा योजना के अन्तर्गत रीवर रेजुवेशन से सम्बन्धित धनराशि रू० 251.31  (डी०सी०एल०) जमा को भुगतान हेतु राजनीतिक दबाव बनाये जाने उपरान्त भी अधोहस्ताक्षरी द्वारा वित्तीय नियमों को ध्यान में रखते हुए व्यय नहीं किया जाना। राजनीतिक लोगों द्वारा अवैध खनन के प्रयासों को विफल करना एवं ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त करने उपरान्त तुरन्त ही छोड़ने हेतु दबाव में न आना।
 (गढ़वाल), उत्तराखण्ड, पौड़ी के आदेशों के कम में कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग, लैन्सडौन द्वारा सनेह पार्क एवं कॉर्बेट रिसेप्शन सेन्टर के समीप बैम्बू हट एवं पार्क में नियम विरुद्ध हो रहे कार्यों को राजनीतिक दबाव के बावजूद रुकवा देना व सम्बन्धित के खिलाफ एच0-2 केस दर्ज करना।
कुछ खास व्यक्तियों के उपनल के माध्यम से प्रभाग में सम्मिलित करने हेतु राजनीतिक दबाव बनाया जाना। अधोहस्ताक्षरी द्वारा नियमों को ध्यान में रखते हुए उपनल में समाहित न किया जाना।

उपरोक्त कारणों का उल्लेख प्रमुख अखबारों एवं न्यूज पोर्टल पर भी प्रकाशित किया गया है.

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File- Image Harak singh rawat

(संलग्नक- two ) ।
उपरोक्त के क्रम में अवगत कराना है कि इस वन प्रभाग में पिछले पाँच वर्ष में अत्यधिक राजनीतिक हस्तक्षेप रहा है एवं पिछले पाँच वर्ष में 05 प्रभागीय वनाधिकारियों की स्थानान्तरण तैनाती की गयी एवं प्रत्येक प्रभागीय वनाधिकारियों को अत्यन्त ही राजनीतिक दबाव झेलना पड़ा है।
अधोहस्ताक्षरी को भी इसी क्रम में निराधार एवं तथ्य विहीन भूमिका बनाते हुए मुख्यालय सम्बद्ध करने का आदेश पारित किया जाना प्रतीत होता है।। यहां तक कि शासनादेश के अल्प अवधि बाद ही चार्ज हस्तान्तरण करने की धमकी एवं जार्च हस्तान्तरण न करने पर एकतरफा चार्ज हस्तान्तरण करने का प्रयास किया गया है। इन समस्त प्रकरणों से अधोहस्ताक्षरी को आत्मविश्वास पर गहरा प्रभाव पड़ा है एवं इस तरीके की कार्यवाही न्यायोचित नहीं है, इससे न केवल अधोहस्ताक्षरो का मनोबल टूटा है, बल्कि एक नव नियुक्त भारतीय वन सेवा के अधिकारी की छवि धूमिल हुई हैं।
अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के कम में अनुरोध है कि अधोहस्ताक्षरी के इस सम्बद्ध के प्रकरण को सक्षम स्तर पर रखेंगे एवं इस आदेश को निरस्त करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करेंगें, ताकि भविष्य में नव नियुक्त अधिकारियों को हथोसाहित न हो। साथ ही यह भी अनुरोध है कि इस प्रकार के प्रकरण की भविष्य में पुर्नरावृत्ति न हो इस हेतु प्रभावी कार्यवाही की जाये।

संलग्न- उपरोक्तानुसार

भवद्रीय

(दीपकसिंह

प्रभागीय वनाधिकारी, लैन्सडौन वन प्रभाग, कोटद्वार।

Author: admin

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