आखिर, 400 सालों बाद क्यों बदला जा रहा है, बागनाथ मंदिर का बिंजौला

आर सी ढौंड़ियाल

करीब 400 साल बाद बदला जा रहा है बागेश्वर के मशहूर बागनाथ मंदिर का बिंजौरा बागेश्वर के ऐतिहासिक बागनाथ मंदिर के सुंदरीकरण के तहत करीब 400 साल बाद मंदिर का बिजौरा (छत पर लकड़ी का कवर) बदलने का काम शुरू हो गया है। सोमवार को मंदिर के शीर्ष में बिजौरा लगाने का कार्य शुरू हो गया है। मंदिर में वर्ष 1602 बने बिजोरा को बदलने के काम की शुरुआत बागनाथ मंदिर प्रबंध समिति के संरक्षक रतन सिंह रावल ने पूजा- अर्चना के साथ की।

नए बिंजौरा में देवदार की लकड़ियों की छत लगाई जा रही है। इसके लिए देहरादून के चकराता से खास तौर से कारीगरों को बुलाया गया है। शासन ने बागनाथ मंदिर समेत मंदिर परिसर में बने तमाम मंदिरों का बिजौरा बदलने के साथ ही मंदिर परिसर में पुरातत्व विभाग का संग्रहालय बनाने और बागनाथ, कालभैरव मंदिर में धर्मशालाओं के नवनिर्माण के साथ ही तमाम कामों के लिए 1.30 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की है।

इस रकम से मंदिर समूहों के सुंदरीकरण का कार्य शुरू हो गया है। ग्रामीण निर्माण विभाग मंदिर के सुंदरीकरण नवनिर्माण का कार्य करा रहा है। फरवरी 2021 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

आपको बता दें कि 13 वीं शताब्दी में चंद्र वंशी राजाओं द्धारा बनाये गए  ऐतिहासिक बागनाथ मंदिर का बिजौरा करीब 400 साल बाद बदला जा रहा है! साल 1602 में मंदिर में बने बिजोरा को अब बदलने के काम की शुरुआत हो चुकी है पुराने बिजोरा को निकाल लिया गया है  इसकी  जगह पर देवदार की

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